हिमालय, जिसे “धरती का स्वर्ग” भी कहा जाता है, वह अपनी बर्फ़ से ढकी चोटियों, गहरी घाटियों और रहस्यमयी प्राकृतिक खज़ानों के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन इसके बीच हिमालय की 4 छिपी हुई झीलें भी हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ये झीलें केवल पानी की संरचना नहीं बल्कि इतिहास, लोककथाओं और रहस्य का संगम हैं। आइए जानते हैं हिमालय की 4 छिपी हुई झीलों के बारे में, जो प्राकृतिक सुंदरता और रहस्यमयी कहानियों के कारण यात्रियों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करती हैं।
1. रूपकुंड झील (कंकालों की झील), उत्तराखंड

- स्थान: चमोली ज़िला, उत्तराखंड, समुद्र तल से लगभग 5,029 मीटर की ऊँचाई पर।
- विशेषता: इसे “Skeleton Lake” भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ सैकड़ों मानव कंकाल मिले हैं।
- रहस्य: वैज्ञानिक मानते हैं कि 9वीं शताब्दी में ओलों की भारी वर्षा से यहाँ यात्रियों का निधन हुआ था, आज भी कंकाल बर्फ़ के पिघलने पर दिखाई देते हैं।
- कैसे पहुँचे: रूपकुंड झील तक पहुँचने के लिए ट्रेकिंग करनी पड़ती है। सबसे लोकप्रिय मार्ग लोहाजंग से शुरू होता है।
- Best Time to Visit: मई से जून और सितंबर से अक्टूबर।
- Nearby Attractions: बेदनी बुग्याल और त्रिशूल पर्वत।
2. गुरुडोंगमार झील, सिक्किम

- स्थान: उत्तरी सिक्किम, लाचुंग से करीब 90 किमी दूर।
- विशेषता: यह दुनिया की सबसे ऊँची झीलों में से एक है (ऊँचाई 5,183 मीटर)।
- धार्मिक महत्व: स्थानीय लोग इसे पवित्र मानते हैं और मान्यता है कि गुरु पद्मसंभव ने इसे आशीर्वाद दिया था। इसी कारण इसका एक हिस्सा कभी जमता नहीं है।
- कैसे पहुँचे: गंगटोक से सड़क मार्ग द्वारा लाचुंग और फिर वहाँ से झील तक जीप/टैक्सी उपलब्ध होती है।
- Best Time to Visit: अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर।
- Nearby Attractions: लाचुंग, युमथांग वैली, लाचेन मठ।
3. त्सो मोरीरी झील, लद्दाख

- स्थान: रूपशु घाटी, लद्दाख, समुद्र तल से लगभग 4,522 मीटर की ऊँचाई पर।
- विशेषता: यह खारे पानी की झील है और 28 किमी लंबी है।
- जैव विविधता: यहाँ बार-हेडेड गीज़ और काले गले वाले सारस जैसे दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं।
- रहस्य: यहाँ तक पहुँचना बेहद कठिन है, इसलिए यह जगह अब भी पर्यटकों की भीड़ से दूर है।
- कैसे पहुँचे: लेह से कार/बाइक द्वारा लगभग 6 घंटे का सफ़र।
- Best Time to Visit: जून से सितंबर।
- Nearby Attractions: कोरज़ोक मठ, त्सो कार झील।
4. शेष नाग झील, जम्मू-कश्मीर

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- स्थान: पहलगाम से करीब 23 किमी दूर, ऊँचाई 3,590 मीटर।
- विशेषता: इसका पानी नीला-हरा और बेहद स्वच्छ होता है।
- धार्मिक महत्व: अमरनाथ यात्रा मार्ग पर स्थित होने के कारण यह धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
- लोककथा: मान्यता है कि इस झील में भगवान शेषनाग निवास करते हैं।
- कैसे पहुँचे: पहलगाम से चंदनवारी होते हुए ट्रेकिंग मार्ग से।
- Best Time to Visit: जुलाई से सितंबर (अमरनाथ यात्रा के समय)।
- Nearby Attractions: अमरनाथ गुफा, बेटाब वैली, पहलगाम।
इन झीलों की यात्रा क्यों करें?
- प्राकृतिक सौंदर्य – ये झीलें घने जंगलों, बर्फीली चोटियों और शांत वातावरण से घिरी हुई हैं।
- एडवेंचर – अधिकतर झीलें कठिन ट्रेकिंग मार्गों पर हैं, जिससे एडवेंचर प्रेमियों को खास अनुभव मिलता है।
- धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व – कई झीलें पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई हैं।
- फोटोग्राफी और रिसर्च – इन झीलों का रहस्य और सौंदर्य इन्हें फोटोग्राफर्स और शोधकर्ताओं के लिए आदर्श बनाता है।
निष्कर्ष
हिमालय की 4 छिपी हुई झीलें सिर्फ़ पर्यटन स्थल नहीं बल्कि इतिहास, रहस्य और संस्कृति का अनोखा संगम हैं। रूपकुंड के कंकालों से लेकर गुरुडोंगमार की धार्मिक मान्यताओं तक, हर झील अपनी अलग कहानी कहती है। अगर आप यात्रा और रहस्य प्रेमी हैं, तो इन झीलों की खोज आपके जीवन का यादगार अनुभव हो सकता है।
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