Sheopur (Kuno): नए साल की शुरुआत के साथ ही भारत के प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah) के लिए दुगनी खुशखबरी आई है। कुनो नेशनल पार्क के अधिकारियों के मुताबिक, पार्क में मौजूद तीन मादा चीता गर्भवती हैं और जल्द ही शावकों को जन्म दे सकती है। वहीं दूसरी तरफ, चीतों के संख्या को बढ़ाने के लिए फरवरी 2026 में बोत्सवाना से 8 नए चीतों का एक और दल भारत लाने की तैयारी हो चुकी है।
फरवरी 2026 में बोत्सवाना से आएंगे नए चीता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में बोत्सवाना गया था। वहां से 8 चीतों को भारत लाने पर सहमति बन गई है। उम्मीद है कि यह प्रक्रिया फरवरी 2026 तक पूरी हो जाएगी। इसका मकसद भारत में चीतों की जेनेटिक विविधता को बनाए रखना है।
गांधी सागर अभ्यारण्य है तैयार
कूनो में बढ़ती संख्या को देखते हुए, नए चीतों के लिए मध्य प्रदेश के गांधी सागर अभ्यारण्य को दूसरे घर के तौर पर तैयार किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि वहां बाड़ लगाने (Fencing) का काम पूरा हो चुका है और चीतों के लिए शिकार की भी पर्याप्त व्यवस्था कर दी गई है।
स्थानीय लोगों को कैसे होगा फायदा?
प्रोजेक्ट चीता से न सिर्फ जंगल बचेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा। जैसे-जैसे कूनो में टूरिस्ट बढ़ेंगे, वैसे-वैसे श्योपुर और आसपास के जिलों में होटल, गाइड और ट्रांसपोर्ट का काम बढ़ेगा। सरकार ने स्थानीय युवाओं को ‘चीता मित्र’ (Cheetah Mitra) बनाकर उन्हें रोजगार से जोड़ने की पहल पहले ही शुरू कर दी है।
प्रोजेक्ट चीता के सामने क्या हैं चुनौतियां?
सिर्फ चीतों को भारत लाना ही काफी नहीं है, उन्हें यहां बसाना एक बड़ी चुनौती रही है। पिछले कुछ सालों में कूनो में कई चीतों की जान भी गई है। इसके पीछे मुख्य कारण ‘सीप्टीसीमिया’ (Septicemia) नामक संक्रमण बताया गया था, जो बरसात के मौसम में चीतों की गर्दन पर लगे रेडियो कॉलर की वजह से फैला था।
इसके अलावा, कूनो नेशनल पार्क में तेंदुओं (Leopards) की भी बड़ी आबादी है, जो अक्सर चीतों के शावकों के लिए खतरा बन जाते हैं। हालांकि, वन विभाग ने अब निगरानी बढ़ा दी है और वेटनरी डॉक्टर्स की टीम 24 घंटे तैनात रहती है।
प्रोजेक्ट चीता से जुड़ी जरूरी जानकारी
| विवरण (Details) | जानकारी (Info) |
| प्रोजेक्ट का नाम | Project Cheetah (Action Plan for Introduction of Cheetah in India) |
| स्थान | कूनो नेशनल पार्क, मध्य प्रदेश |
| शुरुआत | 17 सितंबर, 2022 |
| पहला जत्था | 8 चीते (नामीबिया से) |
| दूसरा जत्था | 12 चीते (दक्षिण अफ्रीका से) |
| कुल शावक (Cubs) | अब तक 10 से ज्यादा शावकों का जन्म हुआ है |
| बजट | लगभग ₹90 करोड़ (शुरुआती चरण) |
निष्कर्ष
प्रोजेक्ट चीता दुनिया का अपनी तरह का पहला “इंटरकाॅन्टिनेंटल” (Intercontinental) प्रोजेक्ट है। पूरी दुनिया की नजरें भारत पर टिकी हुई है। शुरुआत में कुछ कठिनाइयां जरूर आई, लेकिन अब 3 मादा चीतों का गर्भवती होना और नए चीतों का आना यह दिखाता है कि चीते भारतीय माहौल में ढल रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहा, तो इससे न सिर्फ टूरिज्म बढ़ेगा बल्कि भारत के ग्रासलैंड इकोसिस्टम में भी सुधार आएगा। हमें उम्मीद है कि 2026 चीतों के लिए एक बेहतरीन साल साबित होगा।
प्रोजेक्ट चीता से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQ)
Q1: भारत में अभी कुल कितने चीते मौजूद हैं?
Ans: अगर हम शावकों (Cubs) को भी मिला लें, तो कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या 20 से ऊपर हो गई है। फरवरी 2026 में 8-10 नए चीतों के आने के बाद यह संख्या और बढ़ जाएगी। यह दुनिया में किसी भी एक जगह पर चीतों के पुनर्वास का सबसे बड़ा प्रयास है।
Q2: चीतों को कूनो नेशनल पार्क में ही क्यों रखा गया है?
Ans: कूनो का जंगल ‘ड्राई डेसिडियस’ है, जो अफ्रीकी सवाना जंगलों जैसा ही है। यहाँ चीतों के छिपने के लिए लंबी घास और शिकार के लिए पर्याप्त चीतल और हिरण मौजूद हैं। साथ ही, यहाँ के गांवों को पहले ही विस्थापित किया जा चुका है, जिससे इंसानों और जानवरों के बीच संघर्ष का खतरा कम है।
Q3: क्या आम पर्यटक कूनो में चीतों को देख सकते हैं?
Ans: जी हाँ, कूनो नेशनल पार्क पर्यटकों के लिए खुला है। हालांकि, चीतों को खुले जंगल में छोड़ने के बाद उन्हें देखना पूरी तरह से किस्मत पर निर्भर करता है। अब ‘गांधी सागर अभ्यारण्य’ को भी तैयार किया जा रहा है, जिससे भविष्य में टूरिज्म के और मौके बढ़ेंगे।
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