2026 में वैज्ञानिकों का नया शोध टेक्टोनिक प्लेट्स और जलवायु के बीच एक चौंकाने वाले संबंध की ओर इशारा कर रहा है। आमतौर पर जब हम जलवायु परिवर्तन की बात करते हैं, तो हमारा ध्यान वायुमंडल, वनों की कटाई और प्रदूषण पर केंद्रित होता हैं। लेकिन हाल ही में “Communications Earth and Environment” जर्नल में प्रकाशित यह अध्ययन बताता है कि हमारे पैरों के नीचे खिसकती ये विशाल प्लेटें पृथ्वी के दीर्घकालिक तापमान को नियंत्रित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वैज्ञानिकों ने लंबे समय से यह माना है कि ज्वालामुखी विस्फोट और पहाड़ों का निर्माण वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को नियंत्रित करने वाले प्रमुख जियोलॉजिकल कारक है। लेकिन यह नया शोध “Deep Carbon Cycle” पर प्रकाश डालता है और बताता है कि पृथ्वी का अपना एक
“प्राकृतिक थर्मोस्टेट” है जो लाखों सालों से जलवायु को संतुलित करता आ रहा है।
डीप कार्बन साइकल: जलवायु का अनदेखा पहलू
पृथ्वी की जलवायु प्रणाली केवल सतह पर मौजूद हवा और पानी तक सीमित नहीं है। कार्बन का एक विशाल चक्र पृथ्वी की पपड़ी (Crust) और मेंटल (Mantle) के बीच चलता रहता है। नए अध्ययन के अनुसार, टेक्टोनिक प्लेटों की गति इस चक्र का मुख्य चालक है। जब समुद्री जीव मरते हैं, तो उनके अवशेष समुद्र की तलहटी में जमा हो जाते हैं। इन अवशेषों में कार्बन होता है। लाखों सालों में, यह तलछट (Sediment) चट्टान का रूप ले लेती है, जिससे कार्बन समुद्र के नीचे “लॉक” हो जाता है। यह प्रक्रिया वायुमंडल से कार्बन को हटाने का काम करती है, जिससे पृथ्वी ठंडी होती है। इसे वैज्ञानिकों ने “आइसहाउस” (Icehouse) अवस्था का नाम दिया है।
ज्वालामुखी ही नहीं, प्लेटों का अलग होना भी है जिम्मेदार
पारंपरिक विज्ञान का मानना था कि जब टेक्टोनिक प्लेटें टकराती हैं और ज्वालामुखी फटते हैं, तो पृथ्वी के अंदर जमा CO2 बाहर निकलती है और ग्रह को गर्म करती है। लेकिन नए निष्कर्षों ने एक और महत्वपूर्ण खिलाड़ी की पहचान की है: डायवर्जेंट बाउंड्रीज (Divergent Boundaries), यानी वो स्थान जहाँ प्लेटें एक-दूसरे से दूर हटती हैं।
मध्य-महासागरीय कटक (Mid-ocean ridges) जैसी जगहों पर, जब प्लेटें अलग होती हैं, तो पृथ्वी के मेंटल से नया मैग्मा ऊपर आता है और नई परत का निर्माण करता है। अध्ययन बताता है कि इस प्रक्रिया के दौरान CO2 का उत्सर्जन होता है। यह खोज महत्वपूर्ण है क्योंकि यह साबित करती है कि जलवायु परिवर्तन केवल विनाशकारी ज्वालामुखियों से नहीं, बल्कि पृथ्वी के निर्माण की शांत और निरंतर चलने वाली प्रक्रियाओं से भी जुड़ा है।
पृथ्वी का प्राकृतिक थर्मोस्टेट कैसे काम करता है?
शोधकर्ताओं ने पाया कि टेक्टोनिक प्लेटों की गति में बदलाव पृथ्वी के इतिहास में जलवायु के बड़े बदलावों से सीधे जुड़ा है। यह एक संतुलन का खेल है:
- गर्म काल (Greenhouse): जब प्लेटों की गति तेज होती है और सबडक्शन (जहाँ एक प्लेट दूसरी के नीचे जाती है) बढ़ता है, तो अधिक कार्बन युक्त तलछट पृथ्वी के मेंटल में पिघलती है और ज्वालामुखियों के माध्यम से CO2 के रूप में वापस वायुमंडल में आती है। इससे पृथ्वी का तापमान बढ़ता है।
- ठंडा काल (Icehouse): जब टेक्टोनिक गतिविधियां धीमी होती हैं या जब प्लेटों के टकराने से नए पहाड़ बनते हैं (जैसे हिमालय), तो रासायनिक अपक्षय (Chemical Weathering) बढ़ जाता है। यह प्रक्रिया वायुमंडल से CO2 को खींचती है और उसे खनिजों में बदल देती है, जिससे ग्रह ठंडा होता है।
यह अध्ययन बताता है कि पिछले 130 मिलियन सालों में पृथ्वी की जलवायु में आए उतार-चढ़ाव काफी हद तक इसी “प्लेट टेक्टोनिक थर्मोस्टेट” द्वारा संचालित थे।
समुद्र तल: कार्बन का विशाल भंडार और भविष्य के संकेत
इस शोध का एक और महत्वपूर्ण पहलू समुद्र तल की भूमिका है। समुद्र का तल केवल रेत और चट्टान नहीं है, बल्कि यह कार्बन का एक विशाल कन्वेयर बेल्ट है। अध्ययन में पाया गया कि समुद्री क्रस्ट (Oceanic Crust) की उत्पादन दर और उसमें जमा होने वाले कार्बोनेट तलछट की मात्रा सीधे वैश्विक तापमान को प्रभावित करती है।
वैज्ञानिकों ने उन्नत कंप्यूटर माॅडलिंग का उपयोग करके दिखाया है कि कैसे क्रेटेशियस काल (डायनासोर के समय) की अत्यधिक गर्मी और उसके बाद का शीतलन, प्लेटों की गति में हुए परिवर्तनों का परिणाम था। उस समय, प्लेटों के अलग होने की दर बहुत तेज थी, जिससे भारी मात्रा में CO2 निकली और पृथ्वी एक “हाॅटहाउस” बन गई थी। इसके विपरित, जब यह गति धीमी हुई, तो कार्बन वापस चट्टानों में कैद होने लगा।
यह जानकारी हमें आज के जलवायु परिवर्तन को एक नए संदर्भ में देखने में मदद करती है। हालांकि वर्तमान ग्लोबल वार्मिंग मानवीय गतिविधियों के कारण बहुत तेज गति से हो रही है, लेकिन पृथ्वी की यह प्राकृतिक प्रणाली हमें बताती है कि ग्रह कार्बन को कैसे प्रोसेस करता है। यह अध्ययन भूवैज्ञानिकों और जलवायु वैज्ञानिकों के लिए एक नया माॅडल पेश करता है, जो भविष्य के जलवायु अनुमानों को और अधिक सटीक बनाने में मदद करेगा।
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