दिल्ली-NCR में प्रदूषण से राहत: वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में उल्लेखनीय सुधार के बाद CAQM ने GRAP के पहले चरण (GRAP-1) को तत्काल प्रभाव से हटा लिया है। जानें अब निर्माण कार्यों और सामान्य जन-जीवन पर इसका क्या असर पड़ेगा और दिल्ली की हवा में कितना सुधार हुआ है।
नई दिल्ली: दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। पिछले कुछ दिनों से वायु गुणवत्ता में हो रहे लगातार सुधार को देखते हुए केंद्र सरकार के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सोमवार को पूरे एनसीआर से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण को तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश जारी किया है। यह फैसला सोमवार को हुई उप-समिति की समीक्षा बैठक के बाद लिया गया, जिसमें पाया गया कि दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अब “मध्यम” श्रेणी में आ चुका है।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण से राहत
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक जो 15 मार्च 2026 को 175 दर्ज किया गया था, वह 16 मार्च को तेजी से सुधरकर 119 पर आ गया। मौसम की अनुकूल स्थितियों और तेज हवाओं के कारण प्रदूषकों के छंटने से यह सुधार संभव हो पाया है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक दिल्ली-एनसीआर की हवा “मध्यम” श्रेणी (101-200) में ही बनी रहने की संभावना है। इसी सकारात्मक रिपोर्ट के आधार पर CAQM ने ग्रैप-1 के प्रतिबंधो को वापस लेने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया।
GRAP-1 हटने का क्या होगा असर?
ग्रैप के पहले चरण का मतलब है कि अब एनसीआर में उन सख्त पाबंदियों में ढील मिलेगी जो प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लगाई गई थी।
- निर्माण कार्यों में आसानी: हालांकि धूल नियंत्रण के नियम लागू रहेंगे, लेकिन ग्रैप-1 के तहत आने वाली कुछ सख्त बंदिशों से राहत मिलेगी।
- कूड़ा प्रबंधन: अब खुले में कूड़ा जलाने और तंदूरों में कोयले के इस्तेमाल पर जो विशेष निगरानी थी, उसमें सामान्य नियमों का पालन होगा।
- ट्रैफिक और परिवहन: डीजल जनरेटरों के बेवजह इस्तेमाल पर लगी रोक और पुरानी गाड़ियों की चेकिंग में जो “इमरजेंसी” सख्त थी, वह अब सामान्य स्तर पर आ जाएगी।
धूल नियंत्रण पर रहेगी पैनी नजर
भले ही ग्रैप-1 हटा लिया गया है, लेकिन CAQM ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह छूट नहीं दी गई है। सभी संबंधित एजेंसियों, दिल्ली सरकार और पड़ोसी राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे धूल नियंत्रण के उपायों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
आयोग ने कहा कि अगर भविष्य में हवा की गुणवत्ता दोबारा बिगड़ती है, तो नियमों को फिर से लागू किया जा सकता है। वर्तमान में “धूल रोधी” अभियान के तहत निर्माण स्थलों पर पानी का छिड़काव और एंटी-स्माॅग गन का उपयोग अनिवार्य बना रह सकता है।
क्या है GRAP? (एक नजर में)
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर के आधार पर लागू होने वाली कार्ययोजना है।
इसे 4 चरणों में बांटा गया है:
- चरण 1 (खराब): AQI 201-300 के बीच होने पर।
- चरण 2 (बहुत खराब): AQI 301-400 के बीच होने पर।
- चरण 3 (गंभीर): AQI 401-450 के बीच होने पर।
- चरण 4 (अति गंभीर): AQI 450 से अधिक होने पर।
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