मौसम का पूर्वानुमान 25 प्रतिशत तक रोक सकता है गर्मी से होने वाली मौतें, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

जलवायु परिवर्तन की वजह से धरती का तापमान गंभीर रूप से बढ़ता जा रहा है। इससे तेज गर्मी और भी ज्यादा खतरनाक हो गई है। कई जगहों पर हीटवेव का खतरा मंडरा रहा है, जो लोगों की सेहत पर असर डाल रहा है। भीषण गर्मी की वजह से हर साल कई सारे लोग हस्पतालों में भर्ती होते हैं और उनमें से कुछ अपनी जान गंवा देते हैं।

मौसम का पूर्वानुमान बचा सकता है लोगों की जान

अगर लोगों को मौसम की सटीक जानकारी पहले ही मिल जाए, तो वह मौसम के अनुसार अपना देनिक-कार्य बदल सकते हैं। जैसे अगर, किसी को कल या आने वाले समय में गर्मी ज्यादा बढ़ने की सूचना मिले तो वह पहले से ही तैयार हो जाएगा।

सही समय पर सही जानकारी मिलने से लोगो की सेहत और जान को बचाया जा सकता है। इसलिए मौसम का सटीक पूर्वानुमान बहुत जरूरी है। यह रिसर्च PNAS (Proceedings of the National Academy of Sciences) में प्रकाशित किया गया है।

रिसर्च क्या कहती है?

हाल ही में प्रकाशित हुई इस रिसर्च में वैज्ञानिकों और अर्थशास्त्रियों की एक संयुक्त टीम ने यह समझने की कोशिश की है कि क्या अगर मौसम का पूर्वानुमान ज्यादा सटीक हो जाए, तो क्या इससे होने वाली मौतों और बीमारियों को रोका जा सकता है।

रिसर्च टीम ने कई वर्षों के डाटा को एनालाइज किया, जिसमें मौसम विभाग का पूर्वानुमान, सही तापमान के आंकड़े और लोगों के मौत के रिकाॅर्ड भी शामिल किए गए थे। इस शोध में यह सामने आया है कि जब भी मौसम का पूर्वानुमान सही नहीं होता, खासकर गर्मी को लेकर, तब लोगों की मृत्यु दर ज्यादा दर्ज कि जाती है।

क्यों है खतरनाक गलत मौसम का अनुमान

अगर मान लिजिए मौसम विभाग के द्वारा कहा जाए, कि आज गर्मी सामान्य रहेगी, तो लोग बिना तैयारी किए अपने दफ्तरों और आफिसों के लिए निकल जाएंगे। और बाहर निकलने के थोड़ी देर बाद बहुत जोड़ों की गर्मी बढ़ने लगे, तो ऐसे में लोग पर्याप्त तैयार नहीं कर पाएंगे। ऐसे में उन्हें हीट स्ट्रोक और अन्य दूसरी बीमारियों का खतरा हो सकता है। इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि मौसम का पूर्वानुमान सटीक हो, खासकर गर्मी को लेकर।

भविष्य में मौसम का पूर्वानुमान

शोधकर्ताओं द्वारा आने वाले समय के लिए “मौसम पूर्वानुमान तकनीक” को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया गया है। उन्होंने मौसम वैज्ञानिकों से बात करके अलग-अलग पॉसिबिलिटी बनाई। उनके मुताबिक, यदि तकनीक को सुधारा जाए और मौसम की जानकारी सही हो, तो वर्ष 2100 आते-आते गर्मी से होने वाली मृत्यु में 18 से 25 प्रतिशत तक कमी हो सकती है।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

जलवायु परिवर्तन के वजह से आने वाले समय में और भी अधिक गर्मी बढ़ने की संभावना है। लेकिन अगर एक बेहतर “मौसम पूर्वानुमान तकनीक” विकसित कि जाए, तो इस खतरे को काफी हद तक कम जरूर किया जा सकता है। हम भले ही इस खतरे को पूरी तरह खत्म न कर पाए, लेकिन इसके होने वाले प्रभावों को जरूर कम कर सकते हैं।

नए तकनीकों और एआई की भूमिका

आज के समय में Artificial Intelligence (AI) और नए तकनीकों की सहायता से मौसम का पूर्वानुमान और भी एडवांस्ड किया जा रहा है। कंप्यूटर सिस्टम भी पहले से कई अधिक तेज हो गए हैं। आने वाले समय में इन तकनीकों की सहायता से और भी बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। सरकारों और संस्थानों को इस क्षेत्र में निवेश को लेकर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

आर्थिक और स्वास्थ्य लाभ

रिसर्च यह भी बताती है कि सही मौसम का पूर्वानुमान सिर्फ मृत्यु दर को ही नहीं रोकता, बल्कि इससे आर्थिक लाभ भी होता है। अगर कम संख्या में लोग बीमार पड़ते हैं या मौतों में कमी होती है, तो स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं पर भी दबाव कम होता है। सरकारें ऐसी ही पॉलिसीज में निवेश करना पसंद करती है जिनमें लोगों की जान बचाई जा सके। इसलिए मौसम से जुड़े जानकारी प्रदान करने वाले तकनीकों को बेहतर बनाना एक सही आर्थिक फैसला है।

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