विश्व समुद्री कछुआ दिवस 2026: जानिए इतिहास, महत्व और क्यों संकट में है समंदर के इन जीवों का अस्तित्व

हर साल 16 जून को दुनिया भर में ‘विश्व समुद्री कछुआ दिवस’ (World Sea Turtle Day) मनाया जाता है। इस खास दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को समुद्री कछुओं के महत्व के प्रति जागरूक करना और उनकी लुप्तप्राय हो रही प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। पृथ्वी पर जीवन के संतुलन को बनाए रखने और महासागरों के स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में इन प्राचीन जीवों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। न्यूज वेबसाइट्स और पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह दिन वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय रहता है।

विश्व समुद्री कछुआ दिवस का इतिहास

इस खास दिन को 16 जून को ही मनाने के पीछे एक विशेष और ऐतिहासिक कारण है। यह दिन डॉ. आर्ची कैर (Dr. Archie Carr) के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। डॉ. कैर को दुनिया भर में ‘समुद्री कछुआ जीव विज्ञान का जनक’ (Father of Sea Turtle Biology) माना जाता है। उन्होंने कछुओं के संरक्षण, उनके व्यवहार और उनके प्रवास (migration) पैटर्न पर गहरा शोध किया था। उनके इन्हीं महान प्रयासों को सम्मान देने के लिए ‘सी टर्टल कंजर्वेंसी’ नामक संस्था द्वारा इस दिवस की शुरुआत की गई थी, ताकि वैश्विक स्तर पर कछुओं को बचाने की मुहिम तेज की जा सके।

समुद्री इकोसिस्टम के ‘इंजीनियर’

समुद्री कछुए पिछले 11 करोड़ से अधिक वर्षों से हमारे महासागरों में रह रहे हैं, यानी ये डायनासोर के काल से पृथ्वी पर मौजूद हैं। वैज्ञानिकों द्वारा इन्हें समुद्री इकोसिस्टम का ‘इंजीनियर’ कहा जाता है क्योंकि ये समंदर के स्वास्थ्य को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए, ग्रीन सी टर्टल समुद्री घास खाते हैं, जिससे घास की लंबाई नियंत्रित रहती है और वह सड़ने से बचती है। वहीं, हॉक्सबिल प्रजाति के कछुए समुद्री स्पंज को खाकर कोरल रीफ (मूंगा चट्टानों) को जीवनदान देते हैं। इसके अतिरिक्त, जब ये कछुए तटों पर अंडे देते हैं, तो जो अंडे फूट नहीं पाते, वे सड़कर वहां की तटीय मिट्टी को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करते हैं।

दुनिया में पाई जाने वाली समुद्री कछुओं की 7 प्रजातियां

वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार, दुनिया भर के महासागरों में समुद्री कछुओं की कुल 7 प्रजातियां पाई जाती हैं:

  • ग्रीन सी टर्टल (Green Sea Turtle): मुख्य रूप से समुद्री घास और शैवाल खाने वाली शाकाहारी प्रजाति।
  • हॉक्सबिल टर्टल (Hawksbill Turtle): अपनी नुकीली चोंच और कोरल रीफ को साफ रखने के लिए प्रसिद्ध।
  • लॉगरहेड टर्टल (Loggerhead Turtle): बड़े सिर और मजबूत जबड़े वाले कछुए, जो कड़े खोल वाले जीवों को खाते हैं।
  • लेदरबैक टर्टल (Leatherback Turtle): यह दुनिया की सबसे बड़ी कछुआ प्रजाति है, जिसका खोल हड्डी का न होकर चमड़े जैसा होता है।
  • ऑलिव रिडले टर्टल (Olive Ridley Turtle): आकार में सबसे छोटे और भारत के ओडिशा तट पर लाखों की संख्या में अंडे देने के लिए मशहूर।
  • केम्प्स रिडले टर्टल (Kemp’s Ridley Turtle): यह दुनिया की सबसे दुर्लभ और सबसे गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति है।
  • फ्लैटबैक टर्टल (Flatback Turtle): यह प्रजाति केवल ऑस्ट्रेलिया के आसपास के समुद्रों और तटीय क्षेत्रों में ही पाई जाती है।

अस्तित्व पर मंडराता खतरा

वर्तमान समय में इंसानी गतिविधियों और लापरवाही के कारण इन जीवों का जीवन गंभीर संकट में है। महासागरों में बढ़ता प्लास्टिक प्रदूषण इनका सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका है। कछुए अक्सर पानी में तैरते प्लास्टिक बैग को अपनी पसंदीदा खुराक ‘जेलीफिश’ समझकर खा लेते हैं, जिससे उनके पेट में ब्लॉकगेज हो जाता है और तड़पकर उनकी मौत हो जाती है। इसके अलावा, व्यावसायिक रूप से मछली पकड़ने वाले बड़े जालों में अनजाने में फंसकर भी हर साल हजारों कछुए दम तोड़ देते हैं क्योंकि वे सांस लेने के लिए समुद्र की सतह पर नहीं आ पाते।

ग्लोबल वार्मिंग का घातक प्रभाव

जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग भी कछुओं के लिए एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक संकट बन चुकी है। समुद्री कछुओं की एक जैविक विशेषता होती है कि उनके अंडों से नर पैदा होगा या मादा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि अंडे जिस रेत में दबे हैं उसका तापमान कितना है। यदि रेत का तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है, तो अंडों से केवल मादा कछुए पैदा होते हैं। लगातार बढ़ती वैश्विक गर्मी के कारण अब अधिकांश तटों पर केवल मादा कछुए ही पैदा हो रही हैं। नर कछुओं की इस अत्यधिक कमी के कारण उनके लैंगिक संतुलन और भविष्य में प्रजनन प्रक्रिया पर बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

निष्कर्ष

विश्व समुद्री कछुआ दिवस हमें यह याद दिलाने का अवसर है कि समंदर की सेहत हमारे अपने अस्तित्व से सीधी जुड़ी हुई है। यदि हमें इन प्राचीन और शांत जीवों को विलुप्त होने से बचाना है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तटीय विकास को नियंत्रित करना होगा, सिंगल-यूज प्लास्टिक पर कड़ाई से रोक लगानी होगी और मछली पकड़ने के सुरक्षित तौर-तरीकों (जैसे टर्टल एक्सक्लूडेर डिवाइस) को अपनाना होगा।


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