पृथ्वी का लगभग 71% हिस्सा समंदर से घिरा हुआ है, लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि इंसान ने अभी तक समुद्र का 5% से भी कम हिस्सा ही पूरी तरह खोज पाया है। बाकी का 95% से भी ज्यादा हिस्सा आज भी समुद्र की गहराई में अनछूआ है, अंधेरी गहराइयों में रहने वाले अजीब जीव, रंग बिरंगी मछलियां, विशालकाय जल-गुफाएं और अनगिनत अनजान प्रजातियाॅं। यही कारण है कि, समुद्रों के नीचे छिपी रहस्यमयी दुनिया हमेशा से वैज्ञानिकों, खोजकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करती रही है।
गहराइयों की तीन परतें – एक अलग ही ब्रह्मांड
समुद्रों को उनकी गहराई और प्रकाश पहुँचने की क्षमता के आधार पर तीन प्रमुख ज़ोन में बाँटा जाता है:
1. सनलाइट ज़ोन (Surface Layer) यह समुद्र की ऊपरी परत है जहाँ सूरज की रोशनी पहुँचती है।
- यहीं ज़्यादातर मछलियाँ, कछुए, डॉल्फ़िन और प्रवाल भित्तियाँ पाई जाती हैं।
- फ़ोटोसिंथेसिस होने के कारण समुद्री पौधे यहीं सबसे अधिक उगते हैं।
2. ट्वाइलाइट ज़ोन (Mid Layer) इस परत में बहुत कम रोशनी पहुँचती है।
- तापमान बेहद कम होता है।
- यहाँ रहने वाले जीवों की आँखें बड़ी और संवेदनशील होती हैं ताकि वे थोड़ी-बहुत रोशनी ढूँढ सकें।
- कई जीव अपने शरीर से हल्की रोशनी (Bioluminescence) पैदा करते हैं।
3. मिडनाइट ज़ोन (Deep Sea) यह समुद्र की सबसे रहस्यमयी परत है:
- पूरी तरह अंधेरा
- अत्यधिक दबाव
- बेहद कम तापमान
- अजीब और अनोखे जीव – एंगलर फिश, जायंट स्क्विड, गुल्पर ईल आदि
यही वह जगह है जिसे मानव अभी तक सबसे कम समझ पाया है।
प्रवाल भित्तियाँ – समुद्रों के ‘रेनफॉरेस्ट’
प्रवाल भित्तियाँ (Coral Reefs) समुद्र के सबसे खूबसूरत और रंगीन हिस्सों में से एक हैं। इन्हें समुद्र का “रेनफॉरेस्ट” इसलिए कहा जाता है
क्योंकि:
- यहाँ 25% से अधिक समुद्री जीवों का घर होता है।
- ये समुद्र के इकोलॉजी का संतुलन बनाए रखती हैं।
- तूफ़ानों से तटीय इलाकों की सुरक्षा करती हैं।
लेकिन बढ़ते तापमान और प्रदूषण के कारण कई कोरल रिफ्स Bleaching का शिकार हो रही हैं, जो चिंता का विषय है।
जीव-जंतुओं की अनोखी दुनिया
समुद्रों में करीब 2 लाख से अधिक ज्ञात प्रजातियाँ रहती हैं, लेकिन वैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि वास्तविक संख्या 20/30 लाख से भी ज्यादा हो सकती है।
बायोलुमिनेसेंस (Bioluminescence) – प्रकृति की नैचरल लाइट शो गहरे समुद्र में रहने वाले जीव अपने शरीर से नीली, हरी या लाल रोशनी निकाल सकते हैं।
उदाहरण:
- एंगलर फिश
- फायरफ्लाई स्क्विड
- कॉम्ब जेली
रोशनी का उपयोग ये जीव शिकार को आकर्षित करने, दुश्मन को डराने या अपने साथी को संकेत देने के लिए करते हैं।
जायंट स्क्विड – समुद्री मिथक का सच्चा हीरो यह 13/15 मीटर तक लंबा हो सकता है और कभी-कभी इसे “Sea Monster” भी कहा जाता है।
गहरे समुद्र के शार्क
- ग्रीनलैंड शार्क 400 साल तक जीवित रहने वाली पृथ्वी की सबसे दीर्घायु प्रजाति मानी जाती है।
- फ्रिल्ड शार्क अपने साँप जैसे शरीर के कारण अक्सर “लिविंग फॉसिल” कहलाती है।
समुद्र के नीचे पहाड़, झरने और झीलें!
शायद यह सुनकर आपको हैरानी हो, लेकिन समुद्र के नीचे भी:
पहाड़ (Sea-mounts) दुनिया के कई ज्वालामुखी समुद्र के नीचे सक्रिय होते हैं।
अंडरवॉटर रिवर्स कुछ जगह पर पानी की घनत्व में फर्क के कारण ऐसा लगता है जैसे समुद्र के अंदर एक नदी बह रही हो।
अंडरवॉटर लेक्स सल्ट ब्राइन ज़ोन्स में छोटी-छोटी झीलें पाई जाती हैं जिनका पानी आसपास के समुद्र से अलग होता है।
यह पूरा दृश्य किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है लेकिन यह हकीकत है।
समुद्री जहाज़ों के मलबे – इतिहास की दबी हुई कहानियाँ
समुद्र की गहराइयों में हजारों साल पुराने जहाज़ों के मलबे पाए जाते हैं।
- ये इतिहास, व्यापार मार्गों और सभ्यताओं के रहस्य उजागर करते हैं।
- टाइटैनिक जैसे मशहूर जहाज़ का मलबा भी आज गहरे अटलांटिक में मौजूद है।
समुद्र – धरती पर जीवन की शुरुवात का संकेत दे सकता है
कई वैज्ञानिक मानते हैं कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत समुद्र के गहरे हिस्सों में मौजूद हाइड्रोथर्मल वेंट्स से हुई होगी। यहाँ अत्यधिक तापमान और खनिज मिलकर जीवन के शुरुआती रूपों को जन्म दे सकते हैं।
समुद्रों का पर्यावरणीय महत्व
समुद्र न केवल लाखों जीवों का घर है बल्कि:
- पृथ्वी के ऑक्सीजन का लगभग 50-70% उत्पादन करता है।
- ग्लोबल तापमान नियंत्रित करता है।
- कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जलवायु परिवर्तन को धीमा करता है।
लेकिन प्लास्टिक प्रदूषण, ओवरफिशिंग और ग्लोबल वॉर्मिंग इस संतुलन को गंभीर ख़तरा पहुँचा रहे हैं।
निष्कर्ष
समुद्रों के नीचे की दुनिया जितनी सुंदर है, उतनी ही रहस्यमयी भी। हर साल नई प्रजातियाँ खोजी जा रही हैं, नई गुफाएँ, नए इको-सिस्टम सामने आ रहे हैं। समुद्री दुनिया हमें सिखाती है कि प्रकृति कितनी विशाल और अद्भुत है, और हमें इसे बचाने के लिए आज ही कदम उठाने चाहिए।
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