हिमालय पर्वतमाला (Himalaya Mountain Range) केवल ऊंचे-ऊंचे पहाड़ो का समूह नहीं है, बल्कि यह एशिया के करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है।
हिमालय का अर्थ है हिम + आलय यानी बर्फ का घर।
यह पर्वतमाला विश्व की सबसे ऊंची एंव विशाल पर्वत श्रृंखला है, जिसकी गोद में न केवल गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी महान नदियां जन्म लेती है, बल्कि यह भारत, नेपाल, भूटान और तिब्बत की सांस्कृतिक, धार्मिक और भौगोलिक पहचान भी है।
हिमालय पर्वतमाला की उत्पत्ति

वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग 5 – 6 करोड़ वर्ष पहले टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर से हिमालय पर्वतमाला का निर्माण हुआ। भारतीय प्लेट (Indian Plate) उत्तर की ओर बढ़ी और यूरेशियन प्लेट (Eurasian Plate) से टकराई, जिसके परिणामस्वरूप यह विशाल पर्वतमाला बनी।
यह आज भी “जीवित पर्वत” कहलाती है क्योंकि यहां भूगर्भीय (Geological) हलचलें लगातार होती रहती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि हिमालय अब भी हर वर्ष लगभग 5 मिलीमीटर तक ऊँचाई में बढ़ रहा है, क्योंकि प्लेटों की गति पूरी तरह रुकी नहीं है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में अक्सर भूकंप आते हैं। भूगर्भशास्त्रियों (Geology’s) के अनुसार, हिमालय विश्व की सबसे युवा पर्वतमालाओं में से एक है, और इसकी चोटियाँ अपेक्षाकृत नई हैं। यही वजह है कि यहाँ की ढलानें तीव्र हैं और नदियाँ तेज बहाव वाली होती हैं। इस निरंतर बदलाव ने हिमालय पर्वतमाला को न केवल भूगोल का एक अद्भुत उदाहरण बनाया है बल्कि इसे वैज्ञानिक अध्ययन का भी प्रमुख केंद्र बना दिया है।
विस्तार और प्रमुख भाग

हिमालय लगभग 2,400 किलोमीटर लंबा और 150 – 400
किलोमीटर चौड़ा है। इसका विस्तार पाकिस्तान से लेकर भारत, नेपाल, भूटान, और म्यांमार तक फैला हुआ है।
हिमालय को सामान्यतः तीन मुख्य भागो में बांटा जाता है:
1. शिवालिक (बाहरी हिमालय)
- सबसे निचला भाग
- ऊँचाई: 600 से 1,500 मीटर
- विशेषता: पथरीली घाटियाँ, छोटी नदियाँ और जंगल
2. मध्य हिमालय (हिमाचल या लघु हिमालय)
- ऊँचाई: 3,500 से 4,500 मीटर
- यहाँ शिमला, मसूरी, नैनीताल जैसे हिल स्टेशन स्थित हैं
- खेती योग्य घाटियाँ (कश्मीर, कांगड़ा, कुल्लू घाटी)
3. महान हिमालय (हिमाद्रि)
- सबसे ऊँचा क्षेत्र
- ऊँचाई: 6,000 मीटर से अधिक
- यही दुनिया की सबसे ऊंची चोटीयां स्थित हैं जैसे माउंट एवरेस्ट, कंचनजंघा, नंगा परबत, धौलागिरि आदि।
प्रमुख चोटियाँ
- माउंट एवरेस्ट (सागरमाथा) – 8,848.86 मीटर, विश्व की सबसे ऊँची चोटी (नेपाल-तिब्बत सीमा पर)
- कंचनजंघा – 8,586 मीटर (भारत-नेपाल सीमा पर)
- नंगा परबत – 8,126 मीटर (पाकिस्तान)
- धौलागिरि – 8,167 मीटर (नेपाल)
- नंदा देवी – 7,816 मीटर (भारत, उत्तराखंड)
हिमालय की नदियाँ

हिमालय के बर्फ और ग्लेशियर ही गंगा, यमुना, सिंधु, ब्रह्मपुत्र जैसी महान नदियों का निर्माण करते हैं।
- सिंधु नदी तंत्र – पाकिस्तान और उत्तर भारत को जीवन देता है।
- गंगा नदी तंत्र – भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर।
- ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र – तिब्बत से निकलकर पूर्वोत्तर भारत और बांग्लादेश तक जाती है।
जलवायु और जैवविविधता
- हिमालय पर्वतमाला की जलवायु ऊँचाई और दिशा के अनुसार बदलती है।
- निचले भाग में उपोष्णकटिबंधीय जलवायु, मध्य में समशीतोष्ण और ऊँचाई पर टुंड्रा जैसी ठंडी जलवायु पाई जाती है।
- यहाँ हिमालयन मोनाल (उत्तराखंड का राज्य पक्षी), लाल पांडा, हिम तेंदुआ और याक जैसी प्रजातियाँ मिलती हैं।
- वनों में देवदार, चीड़, भोजपत्र और बुरांश जैसी वनस्पतियाँ होती हैं।
सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

- हिमालय हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म में पवित्र माना जाता है।
- कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं।
- ऋषि-मुनियों की तपोभूमि और योग-साधना का केंद्र भी हिमालय ही है।
पर्यटन और रोमांच
- हिमालय पर्वतमाला: mountaineering, trekking, river rafting, skiing जैसे adventure sports के लिए प्रसिद्ध है।
- कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और नेपाल के हिल स्टेशन लाखों सैलानियों को आकर्षित करते हैं।
- हर साल हजारों पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट और अन्य चोटियों को फतह करने निकलते हैं।
पर्यावरणीय चुनौतियाँ

- ग्लेशियर पिघलना: Climate Change के कारण तेजी से बर्फ पिघल रही है।
- भूस्खलन और बाढ़: मानसून और भूकंप से अक्सर आपदाएँ आती हैं।
- अत्यधिक पर्यटन: पर्यावरण असंतुलन और कचरे की समस्या बढ़ रही है।
- जैव विविधता संकट: कई प्रजातियाँ विलुप्ति की ओर हैं।
आधिकारिक स्रोत: {Wikipedia} द्वारा प्रकाशित लेख
निष्कर्ष
हिमालय पर्वतमाला केवल पर्वत श्रृंखला नहीं है बल्कि यह करोड़ों लोगों की संस्कृति, आस्था और आजीविका का आधार भी है। यह हमें नदियां, जलवायु संतुलन और प्राकृतिक संसाधन प्रदान करता है। लेकिन बढ़ते जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों से हिमालय पर्वतमाला खतरे में है। हमें प्रकृति की इस अद्भुत धरोहर को संरक्षित करने के लिए जिम्मेदारी से कदम उठाने होंगे।
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