प्रकृति ने पृथ्वी को अनेक अद्भुत उपहार दिए हैं, जिनमें पर्वत सबसे महत्वपूर्ण है। पर्वत न केवल पृथ्वी की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि मानव जीवन, जल संसाधन, जैव-विविधता और जलवायु संतुलन में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इन्ही पर्वतो के महत्व को समझाने और उनके संरक्षण के लिए हर साल 11 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस 2025 में विशेष रूप से ग्लेशियरों के महत्व पर केंद्रित है।
अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस क्या है?
अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस एक वैश्विक दिवस है, जिसे संयुक्त राष्ट्र (United Nations) द्वारा मान्यता प्राप्त है। इसका उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों के पर्यावरण, वहां रहने वाले समुदायों और पर्वतों से मिलने वाले प्राकृतिक संसाधनों के प्रति दुनिया को जागरूक करना है। इस दिवस को पहली बार 11 दिसंबर 2003 को मनाया गया था। तब से हर साल यह दिन पर्वतों के सतत विकास और संरक्षण के लिए समर्पित है।
अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस 2025 की थीम
2025 की थीम है:
“Glaciers matter for water, food and livelihoods in mountains and beyond”
(ग्लेशियर पर्वतों और उससे आगे के क्षेत्रों में पानी, भोजन और आजीविका के लिए महत्वपूर्ण हैं)
यह थीम इस बात पर जोर देती है कि ग्लेशियर केवल बर्फ के पहाड़ नहीं हैं, बल्कि वे:
- नदियों के प्रमुख स्रोत हैं
- कृषि और पीने के पानी का आधार हैं
- लाखों लोगों की आजीविका से जुड़े हुए हैं
जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जो भविष्य में जल संकट और प्राकृतिक आपदाओं का कारण बन सकते हैं।
पर्वतों का मानव जीवन में महत्व
पर्वतों का योगदान केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि वे कई स्तरों पर मानव जीवन को प्रभावित करते हैं:
1. जल का प्रमुख स्रोत
दुनिया की अधिकांश बड़ी नदियाँ हिमालय, आल्प्स, एंडीज़ जैसे पर्वतों से निकलती हैं। ये नदियाँ करोड़ों लोगों को पीने का पानी और सिंचाई की सुविधा देती हैं।
2. जैव विविधता का केंद्र
पर्वतीय क्षेत्र अनेक दुर्लभ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का घर हैं। यहां मिलने वाली औषधीय जड़ी-बूटियाँ स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
3. जलवायु संतुलन
पर्वत मौसम और वर्षा चक्र को नियंत्रित करते हैं। ये प्राकृतिक ढाल की तरह काम कर बाढ़ और तूफानों के प्रभाव को कम करते हैं।
4. पर्यटन और रोजगार
पर्वतीय पर्यटन स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का बड़ा साधन है। ट्रैकिंग, पर्वतारोहण और धार्मिक पर्यटन अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं।
ग्लेशियर: जीवन की जमी हुई धरोहर
ग्लेशियर पर्वतों की सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति हैं। इन्हें “मीठे पानी का भंडार” कहा जाता है। लेकिन आज ग्लोबल वार्मिंग के कारण:
- ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहे हैं
- नदियों का जलस्तर असंतुलित हो रहा है
- भविष्य में पानी की कमी की आशंका बढ़ रही है
इसलिए अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस 2025 का फोकस ग्लेशियर संरक्षण पर रखा गया है।
पर्वतीय समुदायों की चुनौतियाँ
पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है:
- सीमित संसाधन
- प्राकृतिक आपदाएँ (भूस्खलन, हिमस्खलन)
- जलवायु परिवर्तन का सीधा प्रभाव
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस इन समुदायों की समस्याओं को वैश्विक मंच पर उठाने का अवसर भी है।
पर्वत संरक्षण क्यों जरूरी है?
यदि पर्वत और ग्लेशियर सुरक्षित नहीं रहेंगे तो:
- जल संकट बढ़ेगा
- जैव विविधता नष्ट होगी
- प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ेंगी
- मानव जीवन और आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा
इसलिए पर्वत संरक्षण केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि मानव भविष्य का सवाल है।
हम अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस कैसे मना सकते हैं?
- पर्यावरण संरक्षण पर जागरूकता फैलाकर
- प्लास्टिक उपयोग कम करके
- वृक्षारोपण अभियान चलाकर
- पर्वतीय पर्यटन में जिम्मेदार व्यवहार अपनाकर
- सोशल मीडिया और ब्लॉग के माध्यम से पर्वत संरक्षण का संदेश फैलाकर
निष्कर्ष
अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस 2025 हमे यह याद दिलाता है कि पर्वत और ग्लेशियर मानव जीवन की रीढ़ है। जल, भोजन, जलवायु और आजीविका – सब कुछ किसी न किसी रूप में पर्वतों पर निर्भर है। अगर हम आज पर्वतों और ग्लेशियरों की रक्षा नही करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका भारी मूल्य चुकाना पड़ेगा। पर्वत केवल प्रकृति की सुंदर रचना नही है, बल्कि यह जीवन का आधार है। उनका संरक्षण ही सुरक्षित भविष्य की कुंजी है।
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