जैव विविधता (Biodiversity) का महत्व: यह धरती और मानव जीवन के लिए क्यों जरूरी है?

क्या आप जानते हैं? वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी पर लगभग 87 लाख (8.7 Million) प्रजातियां हैं, लेकिन हम उनमें से केवल 15% को ही पहचान पाए हैं।

धरती पर जीवन की कल्पना जैव विविधता के बिना नहीं की जा सकती। जंगलों में फैले पेड़-पौधे, नदियों में तैरती मछलियाँ, और मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव – ये सभी मिलकर जैव विविधता (Biodiversity) का निर्माण करते हैं।

आज जब WWF की रिपोर्ट बताती है कि पिछले 50 वर्षों में वन्यजीवों की आबादी में 69% की गिरावट आई है, तब “जैव विविधता का महत्व” समझना और भी जरूरी हो गया है।

जैव विविधता क्या है?

जैव विविधता का महत्व

सरल शब्दों में, पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीव-जंतुओं, पौधों और सूक्ष्मजीवों की विविधता को जैव विविधता कहा जाता है। यह मुख्य रूप से तीन स्तरों पर काम करती है:

  1. प्रजातीय विविधता (Species Diversity): जैसे शेर, बाघ, और हाथी अलग-अलग प्रजातियां हैं।
  2. आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): एक ही प्रजाति में भिन्नता (जैसे आम की 1000 से ज्यादा किस्में – लंगड़ा, दशहरी, अल्फांसो)।
  3. इकोलॉजिकल विविधता (Ecosystem Diversity): जंगल, रेगिस्तान, और सुंदरबन जैसे मैंग्रोव क्षेत्र।

1. Ecosystem Balance: प्रकृति का संतुलन

प्रकृति एक जटिल मशीन की तरह है जहाँ हर जीव का एक ‘Job Role’ है।

  • उदाहरण: मधुमक्खियों को ही लें। दुनिया की 75% प्रमुख फसलें परागण (Pollination) के लिए मधुमक्खियों और कीटों पर निर्भर हैं। अगर मधुमक्खियां गायब हो जाएं, तो सेब, बादाम और कॉफी जैसी चीजों का उत्पादन खत्म हो जाएगा।
  • सूक्ष्मजीव: केंचुए और बैक्टीरिया ‘नेचुरल रिसाइकिलर्स’ हैं जो कचरे को खाद में बदलते हैं।

2. Food Chain की सुरक्षा

हर जीव भोजन के लिए दूसरे पर निर्भर है।

  • उदाहरण: समुद्र में फाइटोप्लांकटन (Phytoplankton) नामक छोटे पौधे होते हैं। छोटी मछलियाँ उन्हें खाती हैं, और बड़ी मछलियाँ छोटी मछलियों को। अगर प्रदूषण से फाइटोप्लांकटन मर जाएं, तो पूरी समुद्री खाद्य श्रृंखला (Marine Food Chain) ढह जाएगी, जिसका सीधा असर मानव के सी-फूड (Sea-food) पर पड़ेगा।

3. औषधि और चिकित्सा (Medicinal Value)

क्या आपको पता है कि आधुनिक चिकित्सा जैव विविधता की देन है?

  • कैंसर का इलाज: ‘पैसिफिक यू’ (Pacific Yew) पेड़ की छाल से टैक्सोल (Taxol) नामक दवा बनती है, जो कैंसर के इलाज में काम आती है।
  • मलेरिया: सिनकोना के पेड़ से कुनैन (Quinine) मिलती है।
  • आज भी 25% पश्चिमी दवाइयां सीधे वर्षावनों (Rainforests) के पौधों से आती हैं।

4. जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा

जैव विविधता हमें क्लाइमेट चेंज (Climate Change) और आपदाओं से बचाने में ‘ढाल’ का काम करती है।

  • Velvet सिंक: अमेज़न के वर्षावन (Amazon Rainforest) दुनिया के ‘फेफड़े’ हैं, जो अरबों टन कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं।
  • सुंदरबन का उदाहरण: भारत में सुंदरबन के मैंग्रोव जंगल बंगाल की खाड़ी से आने वाले चक्रवातों (Cyclones) की गति को कम कर देते हैं, जिससे कोलकाता और आसपास के इलाकों में जान-माल का नुकसान कम होता है।

5. आर्थिक महत्व (Economic Value)

विश्व आर्थिक मंच (WEF) के अनुसार, दुनिया की GDP का आधे से ज्यादा हिस्सा ($44 ट्रिलियन) मध्यम या उच्च रूप से प्रकृति पर निर्भर है। पर्यटन, कृषि, और मछली पालन इसके बड़े उदाहरण हैं।

6. सांस्कृतिक महत्व

भारत में जैव विविधता हमारे धर्म और संस्कृति का हिस्सा है। तुलसी, पीपल और बरगद जैसे पेड़ों की पूजा करना हमें संरक्षण का संदेश देता है।

जैव विविधता पर मंडराता खतरा

जैव विविधता का महत्व

IUCN Red List के अनुसार, 41,000 से अधिक प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। इसके मुख्य कारण हैं:

  • Habitat Loss (आवास का विनाश)
  • जलवायु परिवर्तन
  • अवैध शिकार (Poaching)
  • प्रदूषण (विशेषकर प्लास्टिक)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

 प्रश्न (Question) उत्तर (Answer)
विश्व जैव विविधता दिवस कब मनाया जाता है?हर साल 22 मई को अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है।
जैव विविधता का जनक (Father of Biodiversity) किसे माना जाता है?ई.ओ. विल्सन (E.O. Wilson) को अक्सर ‘जैव विविधता का पिता’ कहा जाता है।
भारत में कितने ‘जैव विविधता हॉटस्पॉट’ (Biodiversity Hotspots) हैं?भारत में मुख्य रूप से 4 हॉटस्पॉट हैं: हिमालय, पश्चिमी घाट, इंडो-बर्मा क्षेत्र और सुंदरलैंड।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

प्रसिद्ध जीव-विज्ञानी ई.ओ. विल्सन (E.O. Wilson) ने कहा था, “जैव विविधता को नष्ट करना, उन किताबों को जलाने जैसा है जिन्हें हमने अभी तक पढ़ा भी नहीं है।” जैव विविधता को बचाना केवल जानवरों को बचाना नहीं है, बल्कि यह हमारे भोजन, पानी और हवा को बचाने की लड़ाई है। हमें ‘सतत विकास’ (Sustainable Development) को अपनाना होगा ताकि 2026 और उसके बाद भी यह धरती रहने योग्य बनी रहे।

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