संकट में नैनीताल की लाइफलाइन: 2026 में भी नैनीझील के जलस्तर में दर्ज हुई गिरावट, संरक्षण के लिए 38 करोड़ का मास्टर-प्लान

उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नैनीताल के अस्तित्व पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। शहर की प्यास बुझाने वाली और पर्यटन का कैन्द्र मानी जाने वाली नैनीझील का जलस्तर मार्च 2026 में चिंताजनक स्तर पर बना हुआ है। पिछले साल (2025) की ऐतिहासिक गिरावट के बाद, इस साल भी सर्दियों में उम्मीद के मुताबिक बर्फबारी और बारिश न होने के कारण स्थिति “गंभीर” बनी हुई है।

आंकड़ों की जुबानी: 2025 बनाम 2026

सिंचाई विभाग और पर्यावरण विशेषज्ञों द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 के दूसरे हफ्ते तक नैनीझील का जलस्तर 4.8 फीट के आसपास रिकॉर्ड किया गया है। गौर करने वाली बात तो यह है कि मार्च 2025 में यह जलस्तर 4.7 फीट तक गिर गया था, जो पिछले 5 सालों का सबसे निचला रिकाॅर्ड था। हालांकि इस साल स्थिति पिछले साल से मात्र 0.1 फीट ही बेहतर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले शुष्क महीनों (अप्रैल-जून) में यह गिरावट पिछले सभी रिकॉर्ड तोड सकती है।

ऐतिहासिक तुलना देखें तो साल 2020 में इसी अवधि में जलस्तर 6 फीट 10 इंच था, जो 2022 में 7 फीट 9 इंच तक बेहतर स्थिति में था। लेकिन 2023 से शुरू हुआ गिरावट का यह सिलसिला 2026 तक एक स्थायी संकट का रूप ले चुका है।

बर्फबारी की कमी और बढता प्रदूषण

इस संकट के पीछे बड़ा कारण पश्चिमी विक्षोभ का कमजोर होना माना जा रहा है। 2026 की जनवरी और फरवरी महीने में नैनीताल और इसके आसपास के जलग्रह एरिया में बर्फबारी में भारी कमी देखी गई है। आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में सामान्य से लगभग 70-80% कम बारिश दर्ज की गई है।

इसके अलावा, हाल ही में फरवरी 2026 में आई एक वैज्ञानिक रिपोर्ट ने नई चिंता पैदा कर दी है। इस स्टडी के अनुसार, झील के पानी में माइक्रोप्लास्टिक और ई-कोलाई बैक्टीरिया का स्तर बढ़ रहा है। जलस्तर कम होने के कारण पानी की गुणवत्ता में गिरावट आई हैं, जिससे जलीय जीवन और पेयजल आपूर्ति दोनों पर खतरा बढ़ गया है।

सरकार का 38 करोड़ का “कवच”

झील के अस्तित्व को बचाने के लिए मार्च 2026 में उत्तराखंड सरकार ने एक बड़े बजट को मंजूरी दी है। Live Hindustan के रिपोर्ट के अनुसार, 38 करोड़ रुपए की लागत से नैनीझील के कायाकल्प का काम शुरू किया गया है। इस योजना के तहत मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर काम होगा:

  1. रिटेनिंग वाॅल्स का सुदृढ़ीकरण: झील के किनारों पर बनी पुरानी पत्थर की दीवारों को आधुनिक तकनीक से मजबूत किया जा रहा है ताकि पानी के रिसाव को रोका जा सके।
  2. ड्रेनेज सिस्टम में सुधार: शहर के नालों से आने वाले मलबे और कूड़े को झील में जाने से रोकने के लिए नए फिल्टर और आधुनिक ड्रेनेज चैनल्स बनाए जा रहे हैं।
  3. सूखाताल का पुनर्जन्म: नैनीझील को रिचार्ज करने वाली “सूखाताल” झील को फिर से जीवित करने के काम में तेजी लाई गई है, ताकि प्राकृतिक रूप से जलस्तर बढ़ सके।

पर्यटन सीजन पर संकट की छाया

अप्रैल से शुरू होने वाले पीक टूरिस्ट सीजन के लिए नैनीताल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती शहर को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। वर्तमान में शहर की 76% जल आपूर्ति इसी झील पर निर्भर है। प्रशासन ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि यदि बारिश नहीं हुई, तो होटलों और आवासीय क्षेत्रों में पानी की रोस्टरिंग की जाएगी। पर्यावरणविदों की चेतावनी है कि यदि निर्माण कार्यों और कंक्रीट के बढ़ते जाल पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले कुछ सालों में नैनीझील केवल एक “तालाब” बनकर रह जाएगी।

इसे भी पढ़ें: दिल्ली-NCR में मार्च के महिने में सामान्य से अधिक तापमान के बीच छाई धुंध, मौसम वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

Leave a Comment