NBA ने आक्रामक विदेशी प्रजातियों पर विशेषज्ञ समिति का गठन किया: जानें इसके मुख्य उद्देश्य

भारत की समृद्ध जैव-विविधता, कृषि और इकोसिस्टम पर मंडराते एक बड़े खतरे से निपटने के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण (National Biodiversity Authority – NBA) ने देश भर में आक्रामक विदेशी प्रजातियों द्वारा पैदा होने वाले इकोलॉजिकल और सामाजिक-आर्थिक जोखिमों को दूर करने के लिए एक बहु-विषयक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह फैसला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के सख्त निर्देशों के बाद लिया गया है।

आक्रामक विदेशी प्रजातियां क्या है और यह समिति क्यों बनी?

आक्रामक विदेशी प्रजातियां वह जीव, पौधे या सूक्ष्मजीव होते हैं जो किसी विशेष क्षेत्र के मूल निवासी नहीं होते हैं, लेकिन वहाॅं पहुंचकर तेजी से फैलते हैं, और स्थानीय पर्यावरण के लिए एक गंभीर खतरा बन जाते हैं। ये प्रजातियां अक्सर स्थानीय वनस्पतियों और जीवों के साथ भोजन और संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करती है, जिससे मूल प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा बढ़ जाता है।

NGT ने हाल ही में एक स्वत संज्ञान कार्यवाही (O.A. No. 162/2023) के दौरान इन गैर-देशी प्रजातियों के गंभीर खतरों को रेखांकित किया था। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि ये प्रजातियां न केवल हमारी मूल जैव-विविधता के लिए खतरा है, बल्कि ये प्रमुख इकोसिस्टमस् , कृषि उत्पादन, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और यहां तक कि मानव और वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर भी बेहद नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।

NGT के इसी निर्देश और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की एक विशेष एडवाइजरी के बाद, NBA ने इस गंभीर मुद्दे पर रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए जैव-विविधता अधिनियम, 2002 (2023 में संशोधित) के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए इस समिति का निर्माण किया है।

विशेषज्ञ समिति के प्रमुख कार्य और उद्देश्य

इस नई विशेषज्ञ समिति को भारत में आक्रामक विदेशी प्रजातियों के प्रबंधन के लिए एक ठोस और विज्ञान-आधारित रूपरेखा तैयार करने का काम सौंपा गया है।

इसके मुख्य कार्यों में शामिल हैं:

  • राष्ट्रीय सूची तैयार करना: अलग-अलग राज्यों से मिले जमीनी स्तर की जानकारी के आधार पर देश में मौजूद सभी आक्रामक विदेशी प्रजातियों की एक समेकित और विस्तृत राष्ट्रीय सूची तैयार करना।
  • जोखिम का आकलन और प्राथमिकता: उन विशिष्ट प्रजातियों की पहचान करना और उन्हें प्राथमिकता देना जो वर्तमान में पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए सबसे अधिक या “उच्च जोखिम” पैदा कर रही है।
  • नियंत्रण और प्रबंधन रणनीतियां: इन खतरनाक प्रजातियों की रोकथाम, नियंत्रण और पूरी तरह से उन्मूलन के लिए विज्ञान-आधारित प्रबंधन रणनीतियों और कड़े राष्ट्रीय स्तर के दिशा-निर्देशों की सिफारिश करना।
  • इकोलॉजिकल मरम्मत: जिन क्षेत्रों में विदेशी प्रजातियों ने इकोसिस्टम को नुक्सान पहुंचाया है, वहाॅं के पर्यावरण को वापस उसकी मूल स्थिति में लाने के लिए बहाली के उपाय सुझाना।
  • अनुसंधान और डेटा जनरेशन: वर्तमान ज्ञान में मौजूद कमियों की पहचान करना, सफल प्रबंधन के सर्वोत्तम तरीकों का दस्तावेजीकरण करना और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए दीर्घकालिक अनुसंधान कार्यक्रमों का प्रस्ताव देना।

समिति का नेतृत्व और इसके प्रमुख सदस्य

इस महत्वपूर्ण समिति की अध्यक्षता उत्तराखंड के पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) और वन बल के प्रमुख, रिटायर्ड धनंजय मोहन, आईएफएस कर रहे हैं। उनके साथ सह-अध्यक्ष के रूप में केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन स्टडीज के Vice-Chancellor प्रो. (डाॅ.) ए. बीजू कुमार जिम्मेदारी संभालेंगे।

इस समिति की सबसे बड़ी ताकत इसकी व्यापक विशेषज्ञता है। इसमें इकोलॉजी, फॉरेस्ट्री, कृषि, मछली पालन, समुद्री विज्ञान और जैव-विविधता संरक्षण जैसे विविध क्षेत्रों के दिग्गज शामिल हैं।

समिति में कई प्रमुख मंत्रालयों और देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रख्यात विशेषज्ञ शामिल हैं:

  • भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India)
  • भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (Botanical Survey of India)
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पादप, मछली और कीट आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो
  • भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE)
  • भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII)
  • भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI)

इसके अलावा, तमिलनाडु, ओडिशा, महाराष्ट्र और असम के राज्य वन विभागों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ IUCN जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञ भी इस संपूर्ण-सरकारी दृष्टिकोण का हिस्सा है।

यह विशेषज्ञ समिति अगले 2 सालों की अवधि के लिए कार्य करेगी। उम्मीद है कि इसके वैज्ञानिक सुझाव और नीतियां भारत की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने, इकोसिस्टम के लचीलेपन को बढ़ाने और वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित होगी।


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