प्रकृति के सबसे अद्भुत चमत्कारों में से एक है ‘पक्षियों का प्रवास’। हर साल लाखों-करोड़ों पक्षी सीमाओं को लांघकर, हजारों मील का सफर तय कर एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप जाते हैं। 9 मई 2026 को पूरी दुनिया ‘विश्व प्रवासी पक्षी दिवस’ मना रही है। इस वर्ष यह दिन न केवल उनकी लंबी यात्रा के उत्सव का है, बल्कि उन पर मंडराते गंभीर खतरों के प्रति सचेत होने का भी है। हाल ही में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, जहां मात्र एक रात में 37.3 करोड़ पक्षियों ने उड़ान भरी।
एक रात में 37.3 करोड़ पक्षियों का रिकॉर्ड सफर
अमेरिका के कॉर्नेल लैब के ‘बर्डकास्ट’ (BirdCast) के आंकड़ों ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। 4 मई की शाम से शुरू होकर मात्र एक रात के भीतर करीब 37.3 करोड़ प्रवासी पक्षियों ने उत्तर की ओर अपनी यात्रा जारी रखी। यह संख्या अमेरिका की कुल जनसंख्या से भी अधिक है। पक्षियों का यह विशाल झुंड मुख्य रूप से अमेरिका के दक्षिण और पूर्वी तटों पर देखा गया। रडार और मौसम निगरानी प्रणालियों के 23 वर्षों के डेटा के आधार पर यह गणना की गई है।
पक्षी क्यों तय करते हैं हजारों मील की दूरी?

वैज्ञानिकों के अनुसार, पक्षियों के प्रवास के पीछे दो मुख्य कारण होते हैं:
- भोजन की तलाश: सर्दियों में जब उत्तरी गोलार्ध में बर्फ जम जाती है और कीड़े-मकोड़े या पौधे खत्म हो जाते हैं, तब पक्षी गर्म इलाकों की ओर रुख करते हैं।
- प्रजनन और घोंसले: गर्मियों में उत्तरी इलाके कीटों और नई वनस्पतियों से समृद्ध होते हैं, जो प्रजनन के लिए सबसे अनुकूल समय होता है।
यह यात्रा आसान नहीं होती। पक्षी हिमालय जैसे ऊंचे पहाड़ों और विशाल महासागरों को पार करते हैं। वे दिशा ज्ञान के लिए पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र, सितारों और सूर्य की स्थिति का सहारा लेते हैं।
इकोसिस्टम के लिए क्यों जरूरी हैं ये पक्षी?
प्रवासी पक्षी केवल ‘सैलानी’ नहीं हैं, बल्कि वे हमारे पर्यावरण के ‘स्वास्थ्य रक्षक’ भी हैं।
- कीट नियंत्रण: ये पक्षी हानिकारक कीटों को खाते हैं, जिससे फसलों की रक्षा होती है।
- परागण: फूलों और पौधों के परागण में इनकी अहम भूमिका होती है।
- इकोलॉजिकल संतुलन: बर्डलाइफ इंटरनेशनल के अनुसार, पक्षियों की घटती संख्या जल की गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रति हमारी सहनशीलता को कम कर रही है।
प्रकाश प्रदूषण: एक अदृश्य शिकारी
इस साल के शोध में सबसे बड़ी चिंता ‘प्रकाश प्रदूषण’ को लेकर जताई गई है। रात में प्रवास करने वाले पक्षी तारों की रोशनी के सहारे चलते हैं, लेकिन शहरों की चकाचौंध उन्हें भ्रमित कर देती है।
- भटकाव: कृत्रिम रोशनी के कारण पक्षी अपने मार्ग से भटक जाते हैं।
- थकान और मौत: भटके हुए पक्षी थककर गिर जाते हैं या ऊंची इमारतों से टकराकर अपनी जान गंवा देते हैं।
- जैविक लय में व्यवधान: ‘एलन हमिंगबर्ड’ और ‘गोल्डन-विंग्ड वार्बलर’ जैसी प्रजातियां विशेष रूप से इस कृत्रिम रोशनी से प्रभावित हो रही हैं।
भारत: प्रवासी पक्षियों का दूसरा घर

भारत दुनिया के प्रमुख ‘फ्लाईवेज’ का हिस्सा है। हर साल 370 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षी भारत के जलाशयों और अभयारण्यों में आते हैं।
- प्रमुख मेहमान: साइबेरियन क्रेन, ग्रेटर फ्लेमिंगो, बार-हेडेड गूज़ और अमूर फाल्कन।
- प्रमुख स्थान: राजस्थान का केवलादेव नेशनल पार्क, ओडिशा की चिल्का झील और गुजरात का नल सरोवर।
बर्डलाइफ इंटरनेशनल के सीईओ मार्टिन हार्पर का कहना है कि पक्षी मार्गों की रक्षा करना केवल पक्षियों को बचाने के लिए नहीं, बल्कि मनुष्यों को स्वस्थ आर्द्रभूमि और बेहतर जलवायु प्रदान करने के लिए भी जरूरी है।
विश्व प्रवासी पक्षी दिवस 2026 की थीम
इस वर्ष की थीम है – “हर पक्षी महत्वपूर्ण है, आपका नजरिया मायने रखता है” (Every Bird Counts, Your Vision Matters)। यह थीम हमें याद दिलाती है कि पक्षियों के संरक्षण में हममें से प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका अहम है।
हम क्या कर सकते हैं?
पक्षियों के इस कठिन सफर को आसान बनाने के लिए आप ये छोटे कदम उठा सकते हैं:
- रोशनी कम करें: रात के समय अपने घरों और दफ्तरों की अनावश्यक लाइटें बंद रखें।
- पानी का इंतजाम: गर्मियों में अपनी बालकनी या छत पर मिट्टी के बर्तन में पानी और दाना जरूर रखें।
- शोर-शराबे से बचें: प्रवास के समय या पक्षियों के बसेरे के पास पटाखे न जलाएं।
- पौधे लगाएं: स्थानीय पेड़-पौधे लगाएं जो पक्षियों को भोजन और आश्रय प्रदान कर सकें।
खतरे में अस्तित्व
प्रवासी पक्षी इस धरती की सीमाओं को नहीं मानते, वे एक अखंड दुनिया का संदेश देते हैं। बर्डलाइफ इंटरनेशनल के अनुसार, दुनिया की 40% पक्षी प्रजातियां अब घट रही हैं। यदि हमने आज अपनी जीवनशैली में बदलाव नहीं किया, तो आने वाली पीढ़ियां आसमान में इन ‘उड़ते सितारों’ का दीदार नहीं कर पाएंगी। आइए, इस विश्व प्रवासी पक्षी दिवस पर संकल्प लें कि हम उनके सुरक्षित सफर में बाधक नहीं, बल्कि सहायक बनेंगे।
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