कैलाश पर्वत पर चढ़ना असंभव क्यों माना जाता है? जानिए चौंकाने वाले कारण

कैलाश पर्वत – यह नाम सुनते ही श्रद्धा और रहस्य दोनों का संगम मन में आता है। यह पर्वत तिब्बत में स्थित है और समुद्र तल से लगभग 6,638 मीटर (21,778 फीट) ऊॅंचा है। हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और बोन धर्म – चारों के लिए यह पर्वत अत्यंत पवित्र माना जाता है। लेकिन सबसे बड़ा रहस्य यह है कि आज तक कोई भी इंसान इस पर्वत की चोटी पर नही पहुॅंच पाया है। आखिर क्यों? क्या यह केवल धार्मिक कारण है या फिर इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारण भी है? आइए विस्तार से जानते हैं।

कैलाश पर्वत का धार्मिक महत्व

कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना गया है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती यहां सदैव तपस्या और ध्यान में लीन रहते हैं।
बौद्ध धर्म में इसे “कांग रिनपोछे” कहा जाता है और यह बुद्ध डेमचोक (शांति और आनंद के देवता) का प्रतीक है।
जैन धर्म के अनुसार, यही वह स्थान है जहां पहले तीर्थंकर ऋषभदेव जी ने मोक्ष प्राप्त किया था।
वहीं तिब्बती बोन धर्म में यह पर्वत आत्मिक ऊर्जा और ब्रह्मांड के केंद्र का प्रतीक है।
इस कारण चारों धर्मों के अनुयायी इस पर्वत की परिक्रमा (Kailash Kora) करते हैं, लेकिन चढ़ाई नहीं। इसे पवित्रता का उल्लंघन माना जाता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कैलाश पर्वत का रहस्य

धार्मिक पहलुओं के साथ-साथ कैलाश पर्वत से जुड़े वैज्ञानिक रहस्य भी उतने ही चौंकाने वाले हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार:

1. कैलाश पर्वत का आकार बिल्कुल पिरामिड जैसा है।

कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि यह पर्वत प्राकृतिक रूप से नहीं बल्कि किसी “प्राकृतिक ऊर्जा केंद्र” की तरह कार्य करता है।

2. कम्पास की दिशा बदल जाती है।

पर्वत के पास पहुँचने पर कंपास सही दिशा नहीं दिखाता, जिससे पता चलता है कि यहां अत्यधिक चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) मौजूद है।

3. मानव शरीर पर प्रभाव:

कई यात्रियों ने बताया कि यहाँ समय की गति अलग महसूस होती है। कुछ को ऐसा लगता है जैसे कई घंटे बीत गए, जबकि असल में कुछ मिनट ही होते हैं।

4. भू-वैज्ञानिक कारण

कैलाश पर्वत के आसपास की बर्फ और चट्टानें अत्यंत नाजुक हैं। पर्वत की सतह इतनी खड़ी और अस्थिर है कि कोई भी पर्वतारोही वहाँ टिक नहीं सकता।

कैलाश पर्वत पर चढ़ने के असफल प्रयास

इतिहास में कई बार पर्वतारोही कैलाश पर्वत पर चढ़ने की कोशिश कर चुके हैं। लेकिन हर प्रयास किसी न किसी रहस्यमय कारण से अधूरा रह गया।

  • 1920 के दशक में कुछ रूसी पर्वतारोही वहाँ पहुँचे लेकिन उन्होंने यह दावा किया कि पर्वत के पास “अद्भुत ऊर्जा” महसूस होती है जो उन्हें आगे बढ़ने नहीं देती।
  • 1999 में प्रसिद्ध पर्वतारोही राइनहोल्ड मेस्नर को चीन सरकार ने चढ़ाई की अनुमति दी थी, लेकिन उन्होंने स्वयं ही इंकार कर दिया, यह कहते हुए कि “कैलाश मानव के लिए नहीं, यह देवत्व का स्थान है।”

इसके बाद से चीन सरकार ने आधिकारिक रूप से कैलाश पर्वत पर चढ़ाई पर प्रतिबंध लगा दिया।

कैलाश पर्वत की परिक्रमा

हालाँकि पर्वत की चढ़ाई वर्जित है, लेकिन इसकी परिक्रमा करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
यह यात्रा लगभग 52 किलोमीटर लंबी होती है और इसमें तीन दिन लगते हैं। तीर्थयात्री तिब्बत के मानसरोवर झील से प्रारंभ होकर पर्वत की परिक्रमा करते हैं। कहा जाता है कि एक बार इस यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

रहस्यमय ऊर्जा और पौराणिक कथाएँ

कई पौराणिक और लोककथाओं में कैलाश पर्वत को पृथ्वी का केंद्र (Axis Mundi) बताया गया है।
कहा जाता है कि इसके चारों ओर ब्रह्मांड घूमता है।
कुछ वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि यहाँ किसी प्रकार की कॉस्मिक ऊर्जा (Cosmic Energy) मौजूद है, जो मनुष्य के मस्तिष्क पर प्रभाव डालती है।
तिब्बती साधु और स्थानीय लोग मानते हैं कि जो भी व्यक्ति इस पर्वत पर चढ़ने का प्रयास करता है, उसे दैवी चेतावनी मिलती है या उसका मार्ग किसी रहस्यमय तरीके से रुक जाता है।

आज तक कोई क्यों नहीं चढ़ पाया?

कई कारण हैं जो इस प्रश्न का उत्तर देते हैं:

  1. धार्मिक आस्था और निषेध – चार प्रमुख धर्मों में इसे पवित्र माना जाता है, इसलिए कोई इसे अपवित्र नहीं करना चाहता।
  2. प्राकृतिक कठिनाई ऊँचाई, बर्फ़ीले तूफ़ान और तीव्र ठंड के कारण यह बेहद खतरनाक क्षेत्र है।
  3. भू-वैज्ञानिक अस्थिरता – चट्टानें फिसलन भरी और ढीली हैं।
  4. अलौकिक रहस्य – स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह पर्वत स्वयं अपनी रक्षा करता है।

निष्कर्ष

कैलाश पर्वत केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। चाहे विज्ञान हो या धर्म, दोनों इस पर्वत की रहस्यमय शक्तियों को स्वीकार करते हैं। कैलाश पर्वत का रहस्य – शायद यही कारण है कि आज तक कोई भी इंसान कैलाश की चोटी तक नहीं पहुँचा – क्योंकि कुछ जगहें मानव विजय के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धा के लिए बनी होती हैं।


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