आज की रात होगा ‘Snow Moon’ का दीदार: जानें भारत में दिखने का सही समय और माघ पूर्णिमा का खास संयोग

नई दिल्ली: खगोल प्रेमियों के लिए आज की रात बेहद खास होने वाली है। साल 2026 का दूसरा और फरवरी महिने का पहला पूर्ण चंद्रमा, जिसे दुनिया भर में ‘स्नो मून’ (Snow Moon) के नाम से जाना जाता है, आज रात आसमान की शोभा बढ़ाएगा। भारत में यह नजारा न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से बल्कि धार्मिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज से ही माघ पूर्णिमा की तिथियां प्रारंभ हो रही हैं।

भारत में कब दिखेगा ‘स्नो मून’?

खगोल विज्ञान के अनुसार, चंद्रमा अपनी पूर्णता (100% Full) के चरम पर 2 फरवरी 2026 को तड़के (सुबह) 03:39 AM पर पहुंचेगा। लेकिन आम लोगों के लिए इसका दीदार आज यानी 1 फरवरी की शाम सूर्यास्त के तुरंत बाद से ही शुरू हो जाएगा।

  • चंद्रोदय (Moonrise): 1 फरवरी की शाम को जैसे ही सूर्य अस्त होगा, पूर्व दिशा से ‘स्नो मून’ का उदय होगा।
  • सबसे शानदार समय: आज रात 10 बजे से कल तड़के 4 बजे के बीच चांद अपनी पूरी चमक और सबसे बड़े आकार में नजर आएगा।

इसे ‘स्नो मून’ क्यों कहते हैं?

फरवरी की पूर्णिमा को ‘स्नो मून’ नाम उत्तरी अमेरिका की प्राचीन जनजातियों ने दिया था। इसका मुख्य कारण यह है कि फरवरी के महीने में उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में सबसे अधिक बर्फबारी होती है। इसे ‘हंगर मून’ (Hunger Moon) भी कहा जाता है, क्योंकि भारी बर्फ के कारण पुराने समय में इस दौरान शिकार करना और भोजन जुटाना कठिन हो जाता था।

धार्मिक संयोग: माघ पूर्णिमा और स्नान दान

भारत में आज की पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। 2026 में स्नो मून का समय माघ पूर्णिमा के साथ पड़ रहा है।

  • मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
  • कल सुबह (2 फरवरी) ब्रह्म मुहूर्त में होने वाले स्नान के लिए आज रात का चंद्रमा एक शुभ संकेत माना जा रहा है।
  • इसी पावन अवसर पर संत गुरु रविदास जयंती भी मनाई जा रही है, जिससे इस दिन की प्रासंगिकता और बढ़ गई है।

कैसे देखें यह नजारा?

स्नो मून को देखने के लिए किसी टेलिस्कोप या विशेष चश्मे की जरूरत नहीं है। यदि आसमान साफ रहता है, तो आप अपनी नग्न आंखों से इस विशाल चांद को देख सकते हैं। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए आज शाम ‘मूनराइज’ के वक्त अद्भुत तस्वीरें लेने का बेहतरीन मौका होगा।

वैज्ञानिक पहलू: क्यों खास है इस बार का स्नो मून?

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, स्नो मून के दौरान चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर अपनी अंडाकार कक्षा में एक विशिष्ट बिंदु पर होता है। हालांकि यह ‘सुपरमून’ नहीं है, लेकिन सर्दियों की साफ हवा के कारण इसकी विजिबिलिटी अन्य महिनों की तुलना में अधिक स्पष्ट होती है। इस बार खगोलविदों का मानना है कि वायुमंडलीय घर्षण कम होने के कारण चांद के गड्ढे सामान्य दूरबीन से भी बेहद साफ देखे जा सकेंगे। इसके अलावा, आज रात आसमान में बृहस्पति और मंगल ग्रह की उपस्थिति इसे एक “खगोलीय परेड” जैसा रूप दे रही है, जहाॅं चांद के ठीक ऊपर चमकता हुआ तारा दरअसल सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति होगा।


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