भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में 18 फरवरी, 2026 की तारीख एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से देश को यह खुशखबरी दी कि मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में दक्षिण अफ्रीकी मादा चीता “गामिनी” ने 3 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। यह खबर न केवल वन्यजीव प्रेमियों के लिए उत्साहजनक है, बल्कि यह “प्रोजेक्ट चीता” की सफलता की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर भी है।
तीसरी वर्षगांठ पर अनमोल उपहार
दिलचस्प बात यह है कि इन तीन नन्हे शावकों का जन्म ठीक उसी समय हुआ है जब भारत दक्षिण अफ्रीका से चीतों के आगमन की तीसरी वर्षगांठ मना रहा है। फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों का जत्था भारत लाया गया था, जिनमें गामिनी भी शामिल थी। गामिनी की यह दूसरी सफल ‘डिलीवरी’ है, जो यह साबित करती है कि विदेशी मूल के ये चीते अब भारतीय जलवायु और कुनो के वातावरण में पूरी तरह ढल चुके हैं।
कुनो में बढ़ता कुनबा: आंकड़ों की जुबानी
इन तीन नए सदस्यों के आने के बाद कुनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई है। अगर हम गहराई से देखें, तो भारत में ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत अब तक की प्रगति काफी प्रभावशाली रही है:
- कुल चीते: 38 (वयस्क और शावक मिलाकर)।
- भारतीय मूल के शावक: भारत की धरती पर जन्म लेने वाले और वर्तमान में जीवित शावकों की संख्या अब 27 हो गई है।
- सफल लिट्टर: गामिनी द्वारा दिया गया यह जन्म भारत में चीता प्रोजेक्ट के तहत 9वाँ सफल लिट्टर (litter) है।
यह आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि जब यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ था, तब विशेषज्ञों के मन में विदेशी चीतों के भारत में जीवित रहने और प्रजनन करने की क्षमता को लेकर कई संशय थे। लेकिन गामिनी और अन्य मादा चीताओं ने इन आशंकाओं को गलत साबित कर दिया है।
फरवरी 2026: शावकों की ‘बेबी बूम’
फरवरी का यह महीना कुनो नेशनल पार्क के लिए ‘बेबी बूम’ जैसा रहा है। गामिनी से पहले, महज 10 दिन पहले यानी 7 फरवरी, 2026 को नामीबियाई मादा चीता ‘आशा’ ने भी 5 शावकों को जन्म दिया था। मात्र दो हफ्तों के भीतर कुनो के कुनबे में 8 नए सदस्यों का जुड़ना यह दर्शाता है कि पार्क का इकोसिस्टम चीतों के प्रजनन के लिए पूरी तरह अनुकूल हो चुका है। गामिनी और आशा, दोनों ही अब कुनो की सबसे सफल ‘मादाओं’ के रूप में उभरी हैं।
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निगरानी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
शावकों के जन्म के बाद कुनो नेशनल पार्क का प्रबंधन और वन विभाग की टीम हाई अलर्ट पर है। नवजात शावक काफी संवेदनशील होते हैं, इसलिए उनकी चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। गामिनी और उसके शावकों को वर्तमान में एक सुरक्षित घेरे में रखा गया है, जहाँ उन्हें शिकारियों से सुरक्षा और उचित चिकित्सकीय देखरेख मिल रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ महीने इन शावकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे। वन विभाग की ‘चीता मित्र’ टीम और वैज्ञानिक लगातार गामिनी के व्यवहार और शावकों के स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए हैं। उनकी कोशिश है कि मानवीय हस्तक्षेप कम से कम हो ताकि मादा चीता प्राकृतिक रूप से अपने बच्चों की परवरिश कर सके।
इकोसिस्टम के लिए एक नई उम्मीद
भारत में 1952 में चीतों को आधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित कर दिया गया था। ‘प्रोजेक्ट चीता’ का मुख्य उद्देश्य केवल इन शानदार जानवरों को वापस लाना नहीं है, बल्कि भारत के ग्रासलैंड (घास के मैदानों) के इकोसिस्टम को फिर से जीवित करना है। चीते ‘अम्ब्रेला स्पीशीज’ के रूप में कार्य करते हैं, उनके संरक्षण से घास के मैदानों में रहने वाले अन्य वन्यजीवों और वनस्पतियों का भी संरक्षण होता है।
गामिनी के इन तीन शावकों का जन्म यह संदेश देता है कि भारत न केवल विलुप्त प्रजातियों को वापस लाने का साहस रखता है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित भविष्य देने में भी सक्षम है। सरकार की दूरगामी सोच और वन अधिकारियों के अथक परिश्रम का ही परिणाम है कि आज कुनो की वादियों में एक बार फिर चीतों की दहाड़ और शावकों की चहचहाहट गूंज रही है।
Official Source: Ministry of Environment, Forest, and Climate Change
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