भारत बनेगा वन्यजीव संरक्षण का वैश्विक केंद्र: 2026 में ग्लोबल बिग कैट्स शिखर सम्मेलन की करेगा मेजबानी

भारत एक बार फिर पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अपनी वैश्विक धाक जमाने के लिए तैयार है। केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर घोषित किया है कि भारत इस साल Global Big Cats Summit 2026 की मेजबानी करेगा।यह शिखर सम्मेलन दुनिया की सात प्रमुख बड़ी बिल्ली प्रजातियों – बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा – के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 के दौरान इस मेगा ईवेंट की पुष्टि करते हुए इसे भारत की “साॅफ्ट पावर” और पर्यावरण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

सात प्रजातियाँ, एक मिशन: क्या है इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस?

Global Big Cats Summit 2026 India
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इस शिखर सम्मेलन का मुख्य आधार इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2023 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस गठबंधन की रूपरेखा रखी थी। अब 2026 में, यह गठबंधन एक पूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में उभर रहा है।

भारत का लक्ष्य उन 95 ‘रेंज देशों’ (जहाँ ये बिल्लियाँ पाई जाती हैं) को एक साथ लाना है, ताकि अवैध शिकार, जलवायु परिवर्तन और आवास के नुकसान जैसी चुनौतियों का मिलकर सामना किया जा सके। इस सम्मेलन में दुनिया भर के पर्यावरण मंत्री, वैज्ञानिक और वन्यजीव विशेषज्ञ नई दिल्ली में जुटेंगे।

सम्मेलन की मुख्य रणनीतियाँ और एजेंडा

विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 के इस सम्मेलन में इन प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा होगी:

  1. ज्ञान और तकनीक का साझाकरण: भारत ने ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ और हाल ही में ‘चीता प्रोजेक्ट के माध्यम से जो अनुभव प्राप्त किया है, उसे अन्य देशों के साथ साझा किया जाएगा।
  2. अवैध व्यापार पर लगाम: बड़ी बिल्लियों के अंगों के अंतरराष्ट्रीय अवैध व्यापार को रोकने के लिए एक साझा इंटेलिजेंस नेटवर्क बनाने पर जोर दिया जाएगा।
  3. वित्तीय सहायता: संरक्षण कार्यों के लिए एक समर्पित कोष (Fund) बनाने की योजना है, जिससे कम संसाधनों वाले देशों को मदद मिल सके।
  4. Eco-tourism: स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़कर उनके लिए रोजगार के अवसर पैदा करना।

तैयारी की शुरुआत: बांदीपुर और नागरहोल से शंखनाद

मुख्य शिखर सम्मेलन की तैयारियों ने अभी से गति पकड़ ली है। हाल ही में 9 से 13 फरवरी 2026 के बीच कर्नाटक के प्रसिद्ध बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व में एक उच्च स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस प्री-सममिट इवेंट में 23 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और भारत के संरक्षण मॉडल को करीब से देखा। प्रतिनिधियों ने भारत द्वारा उपयोग की जा रही अत्याधुनिक निगरानी तकनीकों और सामुदायिक भागीदारी की सराहना की।

भारत ही क्यों?

यह सम्मेलन भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। दुनिया की 75% से अधिक बाघों की आबादी भारत में है। इसके अलावा, भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहाँ प्राकृतिक रूप से बाघ, शेर और तेंदुए तीनों पाए जाते हैं। चीतों के आगमन के बाद, भारत अब बड़ी बिल्लियों की विविधता के मामले में दुनिया में सबसे आगे है।

Source: PIB


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