भारत ने स्थिरता और जलवायु कार्रवाई के प्रति अपनी वैश्विक और घरेलू प्रतिबद्धताओं को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की हालिया जानकारी के अनुसार, सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) के विवेकीकरण के माध्यम से अपशिष्ट प्रबंधन सेवाओं, जैव-अपघटनीय (Biodegradable) उत्पादों और हरित परिवहन पर टैक्स की दरों में भारी कटौती की है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में लिए गए इस फैसले का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल विनिर्माण को बढ़ावा देना, देश के कचरा प्रबंधन ढांचे को मजबूत करना और सतत परिवहन समाधानों को प्रोत्साहित करना है। ‘विकसित भारत 2047’ और ‘लाइफ’ (LiFE – पर्यावरण के लिए जीवनशैली) जैसी राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप, ये बदलाव भारत के ‘नेट ज़ीरो 2070’ लक्ष्य का सीधा समर्थन करते हैं और पेरिस समझौते के तहत किए गए वादों को पूरा करने में एक मील का पत्थर साबित होंगे।
1. अपशिष्ट प्रबंधन का सुदृढ़ीकरण: उद्योगों को राहत और पानी की बचत
औद्योगिक कचरे और प्रदूषित जल के सही निस्तारण के लिए सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्रों (CETP – Common Effluent Treatment Plant) की भूमिका सबसे अहम होती है। सरकार ने पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए CETP द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर GST को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है।
यह फैसला विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए एक बड़ी राहत है। छोटे उद्योगों के लिए व्यक्तिगत रूप से अपशिष्ट प्रबंधन करना बेहद खर्चीला होता है, लेकिन अब सामूहिक अपशिष्ट उपचार सस्ता होने से वे आसानी से प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन कर सकेंगे।
- व्यापक प्रभाव: वर्तमान में 21 राज्यों में 222 प्रचालनगत CETP काम कर रहे हैं, जो प्रतिदिन 2212 MLD औद्योगिक अपशिष्ट जल का उपचार करते हैं। अनुमान है कि इस टैक्स कटौती से उद्योगों को प्रतिदिन लगभग 13.27 करोड़ रुपये की भारी बचत होगी।
- चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: यह सुधार उन 53 CETP का भी सीधा समर्थन करता है जो पहले से ही शून्य तरल निर्वहन (ZLD – Zero Liquid Discharge) प्रणाली लागू कर चुके हैं। इससे उपचारित पानी का दोबारा इस्तेमाल उद्योगों में हो सकेगा, जिससे मीठे और पीने योग्य पानी पर उद्योगों की निर्भरता घटेगी।
2. प्लास्टिक प्रदूषण से मुकाबला: सस्ते होंगे बायो-डिग्रेडेबल उत्पाद
सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर लगे राष्ट्रीय प्रतिबंध को धरातल पर और अधिक प्रभावी बनाने के लिए, सरकार ने इसके विकल्पों को सस्ता करने की रणनीति अपनाई है। इसी के तहत बायो-डिग्रेडेबल (जैविक रूप से नष्ट होने वाले) बैगों पर GST को 18 प्रतिशत से घटाकर सीधे 5 प्रतिशत कर दिया गया है।
- कीमतों में भारी गिरावट: इस फैसले से कंपोस्टेबल कैरी बैग की बिक्री कीमत में लगभग 11 प्रतिशत की गिरावट आने की उम्मीद है। जो बैग पहले 200 रुपये प्रति किलो मिलते थे, वे अब लगभग 178 रुपये प्रति किलो तक आ जाएंगे। इससे पर्यावरण के अनुकूल ये विकल्प पारंपरिक और नुकसानदायक प्लास्टिक के मुकाबले बाजार में आसानी से टिक सकेंगे।
- समुद्री जीवन की सुरक्षा: नदियां और महासागर आज प्लास्टिक कचरे का डंपिंग ग्राउंड बन गए हैं। सस्ते बायो-डिग्रेडेबल बैग्स को अपनाने से नदियों और समुद्रों में प्लास्टिक का रिसाव कम होगा। यह उपाय अंतरराष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस जैसे अभियानों का भी समर्थन करता है।
- उद्योगों का विकास: देश में 200 से अधिक प्रमाणित कम्पोस्टेबल निर्माता हैं, जिन्हें अब स्टार्च-आधारित और पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का उत्पादन बढ़ाने का एक मजबूत प्रोत्साहन मिलेगा।
3. हरित परिवहन: स्वच्छ हवा और बेहतर लॉजिस्टिक्स
बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए भारतीय शहरों में हवा को स्वच्छ करना एक बड़ी चुनौती रही है। इसे ध्यान में रखते हुए, भारत के वाहन बेड़े के आधुनिकीकरण के लिए बसों और कमर्शियल मालवाहक वाहनों पर GST को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।
- प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की विदाई: वाहनों की शुरुआती लागत कम होने से अब ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स अपने पुराने, अत्यधिक धुआं उगलने वाले वाहनों को नए BS-VI (भारत स्टेज 6) मानकों वाले मॉडलों से आसानी से बदल सकेंगे। आपको बता दें कि नए BS-VI वाहन पुराने वाहनों की तुलना में 10 गुना तक अधिक स्वच्छ होते हैं।
- सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा: लागत में इस कमी से सरकार और निजी ट्रांसपोर्टर्स दोनों ही सड़कों पर अधिक बसें उतार सकेंगे। इससे शहरों के अंदर और दो शहरों के बीच कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिससे लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करेंगे।
- लॉजिस्टिक्स और कार्बन फुटप्रिंट: मालवाहक वाहनों पर कम टैक्स लगने से सीधे तौर पर परिवहन लागत कम हो जाएगी। इससे न केवल बाजार तक उत्पादों की पहुंच आसान होगी, बल्कि लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint) में भी भारी कमी दर्ज की जाएगी।
भविष्य की राह
GST दरों में किया गया यह रणनीतिक बदलाव सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ धरती छोड़ने की दिशा में एक बड़ा निवेश है। वेस्ट मैनेजमेंट, इको-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स और ग्रीन ट्रांसपोर्ट को किफायती बनाकर भारत सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों एक साथ चल सकते हैं। लागत में कटौती और टिकाऊ उद्योगों को मिलने वाले इस समर्थन से जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत का नेतृत्व और भी सशक्त होकर उभरेगा।
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