पिघलती बर्फ के कारण ध्रुवीय भालू आर्कटिक से गायब होते जा रहे हैं: जानें 2026 की ताजा रिपोर्ट

आर्कटिक की बर्फीली दुनिया के राजा कहे जाने वाले ध्रुवीय भालू आज एक ऐसे संकट से गुजर रहे हैं, जो उनके नियंत्रण से बाहर है। जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान में निरंतर वृद्धि ने उनके प्राकृतिक आवास को विनाश की कगार पर खड़ा कर दिया है। साल 2026 की ताजा वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार, अगर आर्कटिक की बर्फ पिघलने की यही गति बनी रही, तो इस सदी के अंत तक ध्रुवीय भालूओं की अधिकांश उप-आबादियाॅं लुप्त हो सकती है।

समुद्री बर्फ का महत्व और शिकार का संकट

ध्रुवीय भालू पूरी तरह से समुद्री बर्फ पर निर्भर होते हैं।
वे जमीन पर रहने वाले जीव नहीं है, उनका मुख्य भोजन
“रिंग्ड सील” है, जिसे वे केवल बर्फ के छिद्रों के माध्यम से ही पकड़ सकते हैं। समुद्री बर्फ उनके लिए एक “प्लेटफार्म” की तरह काम करती है।

हाल के सालों में, आर्कटिक का तापमान दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में चार गुना तेजी से बढ़ रहा है। इसका सीधा परिणाम यह है कि समुद्री बर्फ सर्दियों में देर से जमती है और गर्मियों में बहुत जल्दी पिघल जाती है। जब बर्फ पिघल जाती है, तो भालुओं को मजबूरन जमीन की तरफ आना पड़ता है, जहां उनके पास शिकार के बहुत कम विकल्प होते हैं। इसे वैज्ञानिक “उपवास की अवधि” कहते हैं। पहले यह अवधि 100 से 120 दिनों की होती थी, लेकिन अब यह बढ़कर 160 से 180 दिनों तक पहुंच गई है। बिना भोजन के इतने लंबे समय तक जीवित रहना, विशेषकर गर्भवती मादाओं के लिए, लगभग असंभव होता जा रहा है।

प्रजनन और शावकों पर प्रभाव

एक स्वस्थ मादा ध्रुवीय भालू को अपने शावकों को पालने के लिए भारी मात्रा में चर्बी जमा करनी पड़ती है। शोध बताते हैं कि भोजन की कमी के कारण मादाओं का वजन गिर रहा है। अगर मादा का वजन एक निश्चित स्तर से कम हो जाता है, तो उसका शरीर गर्भधारण करने की क्षमता खो देता है।

2026 के शुरूआती आंकड़ों के अनुसार, अलास्का और कनाडा के कुछ क्षेत्रों में शावकों की मृत्यु दर में 20% की वृद्धि देखी गई है। शावक या तो कुपोषण के कारण मर रहे हैं या फिर अपनी माॅं के साथ लंबी दूरी तक तैरने के दौरान थककर डूब रहे हैं।

पहले भालुओं को एक बर्फ के टुकड़े से दुसरे तक पहुंचने के लिए थोड़ी ही दूरी तय करनी पड़ती थी, लेकिन अब पिघलती बर्फ के कारण उन्हें सैकड़ों मील तक तैरना पड़ता है, जो उनके शरीर की पूरी ऊर्जा सोख लेता है।

अनुकूलन की नई कोशिश और चुनौतियाॅं

कुछ ध्रुवीय भालू अब नई परिस्थितियों में ढलने की कोशिश कर रहे हैं। नाॅर्वे और ग्रीनलैंड के कुछ हिस्सों में इन्हें अब समुद्री जीवों के बजाय जमीन पर रहने वाले रेनडियर, पक्षियों के अंडे और यहां तक कि कचरे के ढेरों में भोजन तलाशते हुए देखा गया है। हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि जमीन पर मिलने वाला यह भोजन उनकी उच्च-कैलोरी की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता है। सील और मछली खाने से उन्हें जो ऊर्जा मिलती है, उसका कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

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मानव-वन्यजीव संघर्ष की नई लहर

जैसे-जैसे समुद्र की बर्फ गायब हो रही है, भूखे ध्रुवीय भालू भोजन की तलाश में इंसानी बस्तियों की ओर आने लगें हैं। रूस और कनाडा के उत्तरी गांवों में भालुओं का बस्तियों में घुसना अब एक आम घटना बन गई है। यह न केवल इंसानों के लिए खतरा है, बल्कि भालूओं के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है, क्योंकि आत्मरक्षा में अक्सर इन जीवों को मार दिया जाता है।


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