अरुणाचल में मिली तितली की नई प्रजाति, असम के दिग्गज गायक जुबिन गर्ग के नाम पर रखा गया इस तितली का नाम

अरुणाचल प्रदेश में तितली की एक नई प्रजाति खोजी गई है जिसका नाम मशहूर गायक जुबिन गर्ग के नाम पर ‘Euthalia zubengargi’ रखा गया है।

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पूर्वोत्तर भारत की जैव विविधता ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। अरुणाचल प्रदेश के लेपाराडा जिले के बसार क्षेत्र में शोधकर्ताओं ने तितली की एक बेहद दुर्लभ और नई प्रजाति की खोज की है। इस खोज की सबसे खास बात यह है कि इसका नाम असम के महान गायक, संगीतकार और लाखों लोगों के दिल की धड़कन “जुबिन गर्ग” के नाम पर रखा गया है।

विज्ञान और संगीत का अनूठा संगम: ‘युथलिया जुबिनगार्गी’

वैज्ञानिकों ने इस नई प्रजाति का आधिकारिक वैज्ञानिक नाम “Euthalia Limbusa zubengargi” रखा है। इसे आम भाषा में ‘बसार ड्यूक’ के नाम से जाना जाएगा। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह नाम जुबिन गर्ग के पूर्वोत्तर भारत की कला, संस्कृति और संगीत में उनके अतुलनीय योगदान के लिए एक श्रद्धांजलि है।

किसने की यह खोज?

इस महत्वपूर्ण खोज का श्रेय लेपिडोप्टेरिस्ट (तितली विशेषज्ञ) और पुलिस कांस्टेबल रोशन उपाध्याय और कालेश सदाशिवन को जाता है। “बटरफ्लाई मैन” के नाम से मशहूर रोशन उपाध्याय अब तक तितलियों की 13 नई प्रजातियों की खोज कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस विशेष प्रजाति की पहचान करने और उस पर शोध करने में उन्हें लगभग छह महीने का समय लगा।

कैसी दिखती है ‘बसार ड्यूक’ तितली?

शोधकर्ताओं ने इस तितली की शारीरिक विशेषताओं का विस्तृत विवरण साझा किया है:

  • पंखों का फैलाव: इस तितली के पंखों का फैलाव लगभग 44 मिमी है।
  • रंग और बनावट: इसका रंग भूरा-जैतून है, जिस पर सफेद धब्बे बने हुए हैं।
  • निचला हिस्सा: पंखों के निचले हिस्से में हल्का हरापन दिखाई देता है, जो इसे अपनी श्रेणी की अन्य प्रजातियों से अलग बनाता है।

दुर्लभ निवास स्थान और व्यवहार

‘बसार ड्यूक’ मुख्य रूप से 600 से 700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नम और छायादार जंगली इलाकों में पाई जाती है। यह प्रजाति सुबह से दोपहर तक सबसे अधिक सक्रिय रहती है। यह मुख्य रूप से पेड़ों के रस, नम चट्टानों और सड़ने वाले पौधों से अपना पोषण प्राप्त करती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तितली की मौजूदगी उस क्षेत्र के इकोसिस्टम के बेहतर होने का एक बड़ा संकेत है।

भावुक हुई जुबिन गर्ग की पत्नी

इस सम्मान पर जुबिन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा, “प्रकृति की यह संतान अपनी मां की गोद में खिलती रहे… यही वो चीजें हैं जो उन्हें (जुबिन को) खुशी देती थीं और हमें भी! खुशी के ये छोटे पल हमारे जीवन को गर्माहट से भर देते हैं।”

पूर्वोत्तर भारत: रहस्यों का खजाना

यह खोज एक बार फिर सिद्ध करती है कि पूर्वोत्तर भारत के घने जंगल अभी भी कई अनसुलझे रहस्यों और अज्ञात प्रजातियों से भरे हुए हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर इन जंगलों का सही ढंग से संरक्षण किया जाए, तो भविष्य में विज्ञान जगत को कई और नई जानकारियां मिल सकती हैं।

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