नेपाल के लापची घाटी में तीन बड़े शिकारी – तेंदुआ, हिम तेंदुआ और हिमालयी भेड़िया संसाधनों का बंटवारा कर एक साथ रह रहे हैं।
नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में मौजूद लापची घाटी एक बहुत ही विशेष स्थान है। यहाॅं पर तीन बड़े मांसाहारी जानवर साथ रह रहे हैं इनमें तेंदुआ, हिम तेंदुआ और हिमालयी भेड़िया मौजूद हैं। हालांकि इतने बड़े मांसाहारी जानवर एक ही इलाकों में आस-पास नहीं रह पाते हैं, क्योंकि उनमें इलाके और खाने को लेकर लड़ाइयां होती रहती है। मगर यहाॅं तीनों शिकारी जानवर किसी वजह से साथ रह पा रहे हैं। यह सब समझने के लिए वैज्ञानिकों के द्वारा अध्ययन किया गया है।
चुनौतियों के कारण बदलते हालात
आज के दौर में मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक स्थान और वन तेजी से सिमटते जा रहे हैं। वन्यजीवों पर इसका प्रभाव पड़ता है और उन्हें कम जगहो में रहने पर मजबूर करता है। कई बार इन अगल-अलग मांसाहारी जानवरों को एक ही इलाकों में साझेदारी करनी पड़ती है। नेपाल के लापची घाटी में कुछ ऐसा ही हो रहा है। यह हिमालयी क्षेत्र पहले हिम तेंदुए का घर हुआ करता था, लेकिन अब तेंदुआ और हिमालयी भेड़िया भी यहां रहने लगे हैं।
अध्ययन से सामने आए महत्वपूर्ण तथ्य
इनके गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 2018 से 2025 के बीच वैज्ञानिकों ने इनके इलाकों में कैमरा ट्रैप लगाए। उन्होंने इन जानवरों के मल का डीएनए टेस्ट किया जिससे इन जानवरों के खान-पान और रहन-सहन का पता चला। इस विश्लेषण से वैज्ञानिकों की टीम को इनके बारे में सही जानकारी मिली।
एक ही समय और जगह पर तीनों शिकारी
वैज्ञानिक अध्ययन से पता चला कि यह तीनों मांसाहारी जानवर एक ही इलाकों में रहते हैं। और इनमें से खासकर हिम तेंदुआ और हिमालयी भेड़िया दोनों पूरी तरह एक ही क्षेत्र में पाए गए। तेंदुए का भी इन्हीं इलाकों में होने के सबूत मिले। सिर्फ स्थान ही नहीं, बल्कि इन तीनों शिकारी के सक्रिय रहने का समय भी लगभग एक जैसे ही है। ये तीनों ही जानवर ज्यादातर रात के समय सक्रिय होते हैं।
- हिम तेंदुआ: रात में सक्रियता लगभग 59 प्रतिशत
- हिमालयी भेड़िया: रात के समय में सक्रियता लगभग 71 प्रतिशत
- तेंदुए: सक्रियता रात में लगभग 64 प्रतिशत
शिकार के मामलों में अंतर
वैसे तो ये तीनों एक ही क्षेत्र और समय में रहते हैं, लेकिन इन तीनों मांसाहारी जानवरों के शिकार और भोजन में अंतर है। इसी वजह से ये तीनों शिकारी साथ रह पाते हैं। हिम तेंदुआ मुख्यता शाकाहारी जंगली जानवरों का शिकार करते है, जैसे कस्तूरी मृग और ब्लू शीप। वहीं तेंदुए ज्यादातर पालतू पशुओं को अपना शिकार बनाते हैं, जैसे भेड़, बकरी, घोड़े और कुत्ते। इसके अलावा वह जंगली सूअरों का भी शिकार करते हैं। हिमालयी भेड़िए दोनों ही तरह के शिकार करते हैं। वह जंगली जानवरों के साथ-साथ पालतू पशुओं को भी अपना शिकार बनाते हैं। भोजन में अंतर होने के कारण ही इनके बीच प्रतिस्पर्धा कम होती है।
साथ-साथ मौजूदगी का कारण
अध्ययन बताता है कि यह तीनों मांसाहारी जानवर संसाधनों और विभाजनों के कारण एक ही इलाकों में रह पाते हैं। यानी वह एक ही क्षेत्र और समय में रहते हुए भी अलग-अलग संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं। इससे टकराव कम हो जाता है और तीनों के जीवीत रहने की संभावना भी बढ़ जाती है।
संरक्षण का महत्व
नेपाल में हिम तेंदुए बहुत कम संख्या में पाए जाते हैं, इसलिए इनका संरक्षण बहुत जरूरी है। यदि जंगली शिकार कम हो गए, तो इनको अपना पेट भरने के लिए पालतू पशुओं को अपना शिकार बनाना होगा। जिससे “मानव वन्यजीव संघर्ष” बढ़ सकता है। कई बार इंसान अपने पालतू पशुओं को बचाने के लिए इन शिकारी जानवरों को नुक्सान भी पहुंचाते हैं।
इसी वजह से वैज्ञानिक और विशेषज्ञ जंगली शाकाहारी जानवरों को बचाने पर जोर देते है। जिससे जंगलों में शिकार की कमी न हो और इन मांसाहारी जानवरों को शिकार के लिए पालतू जानवरों का शिकार न करना पड़े। नेपाल की लापची घाटी हमें यह बताती है कि प्रकृति में संतुलन कितना जरूरी है। ये तीनों शिकारी जानवर एक ही क्षेत्र में रह सकते हैं, यदि वह अपने संसाधनों का इस्तेमाल सही तरह से करें। अगर इसी वजह से इसमें हल्का-सा भी बदलाव आया, तो इसका प्रभाव पूरे इकोसिस्टम पर पड़ेगा।
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