समुद्री कछुओं पर मंडराता विलुप्ति का खतरा: प्लास्टिक प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन बन रहे सबसे बड़े कारण

समुद्री कछुए हमारी पृथ्वी के सबसे प्राचीन जीवों में से एक है, जो लाखों सालों से महासागरों में रहते आ रहे हैं। लेकिन आज के समय में मानवीय गतिविधियों के कारण इनका भविष्य गंभीर खतरें में है। प्लास्टिक प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने इन शांत जीवों के जीवन को खतरें में डाल दिया है। एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, आज दुनिया भर में इन कछुओं की आबादी तेजी से घट रही है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर क्यों इनका जीवन संकट में है और इन्हें बचाना हमारे पर्यावरण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है।

प्लास्टिक बन रहा महासागरों में मौत का जाल

वर्तमान समय में समुद्रों में लगातार बढ़ता प्लास्टिक का कचरा कछुओं की मौत का सबसे बड़ा कारण बन चुका है। कछुए अक्सर समुद्र में तैरते प्लास्टिक बैग को अपनी पसंदीदा खुराक (जेलीफिश) समझकर खा लेते हैं। यह प्लास्टिक उनके पेट में जमा हो जाता है, जिससे उनकी आंतें ब्लॉक हों जाती है और फिर इसके कारण कुपोषण या संक्रमण से उनकी मौत हो जाती है।

इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का जलस्तर और तापमान दोनों बढ़ रहे हैं। तापमान वृद्धि का सीधा असर कछुओं के अंडों पर पड़ता है, जिससे जन्म लेने वाले कछुओं के लिंग-अनुपात में भारी असंतुलन पैदा हो रहा है। इसके साथ ही मछली पकड़ने वाले जालों में दुर्घटनावश फंसकर भी हर साल हजारों कछुए अपनी जान गंवा देते हैं।

वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, आज दुनिया भर में समुद्री कछुओं की कुल आबादी घटकर महज 65 लाख के आस-पास रह गई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि ‘हाॅक्सबिल’ (Hawksbill) और ‘केम्प्स रिडेल’ (Kemp’s Ridley) जैसी दुर्लभ प्रजातियां विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी है।

समुद्री इकोसिस्टम में कछुओं का योगदान

महासागरों का इकोसिस्टम (Marine Ecosystem) सही ढंग से काम करे, इसके लिए कछुओं का जीवित रहना बहुत जरूरी है। पर्यावरण के संतुलन में इनकी अहमियत को इन मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • जेलीफिश पर नियंत्रण: कई कछुए जेलीफिश खाते हैं, जिससे समुद्र में उनकी आबादी बेकाबू नहीं होती और छोटी मछलियों के पनपने के लिए सुरक्षित माहौल बनता है।
  • समुद्री घास का रखरखाव: ग्रीन सी टर्टल उथले पानी में मौजूद समुद्री घास को चरते हैं, जिससे घास के जंगल स्वस्थ रहते हैं और अन्य समुद्री जीवों को ऑक्सीजन व सुरक्षित घर मिलता है।
  • समुद्र तटों को पोषण: कछुओं द्वारा रेत में दिए गए जो अंडे फूट नहीं पाते या जो खोल बच जाते हैं, वे समुद्री तटों की रेत को नाइट्रोजन और फास्फोरस जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व प्रदान करते हैं, जिससे तटीय वनस्पतियों को बढ़ने में मदद मिलती है।

कौन-कौन से समुद्री कछुए है खतरें में

दुनिया भर में समुद्री कछुओं की कुल 7 प्रजातियां पाई जाती हैं। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की ‘रेड लिस्ट’ (Red List) के अनुसार, इनमें से कई प्रजातियां अपने अस्तित्व को लेकर गंभीर खतरे का सामना कर रही हैं। इन सभी प्रजातियों की वर्तमान संरक्षण स्थिति को इस टेबल फॉरमैट से समझा जा सकता है:

क्र.सं.समुद्री कछुए की प्रजातिIUCN रेड लिस्ट में स्थिति
1हॉक्सबिल कछुआगंभीर रूप से संकटग्रस्त
2केम्प्स रिडले कछुआगंभीर रूप से संकटग्रस्त
3लेदरबैक कछुआअतिसंवेदनशील (Vulnerable)
4लॉगरहेड कछुआअतिसंवेदनशील (Vulnerable)
5ओलिव रिडले कछुआअतिसंवेदनशील (Vulnerable)
6हरा समुद्री कछुआकम चिंताजनक (Least Concern)
7फ्लैटबैक कछुआआंकड़ों का अभाव (Data Deficient)

संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत

अगर हमने समय रहते इन अद्भुत जीवों को बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में महासागरों की पूरी खाद्य श्रृंखला (Food Chain) चरमरा सकती है। इसके लिए हमें सिंगल-यूज प्लास्टिक का पूरी तरह से बहिष्कार करना होगा और समुद्र तटों को साफ रखना होगा। साथ ही, मछली पालन उद्योग को ‘टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस’ (TED) जैसी तकनीकें अपनानी होगी, ताकि जाल में फंसने पर कछुए सुरक्षित बाहर निकल सकें। समुद्री कछुओं का संरक्षण केवल एक जीव को बचाने की मुहिम नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे महासागर और पृथ्वी के भविष्य को सुरक्षित करने का एक जरूरी प्रयास है।


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