आसमान के राजा कहे जाने वाले बाज, चील और गिद्ध जैसे शिकारी पक्षी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। हाल ही में सामने आई कई वैज्ञानिक रिपोर्टों और अध्ययनों से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दुनिया भर में शिकारी पक्षियों और गिद्धों की घटती आबादी अन्य पक्षियों की तुलना में कहीं अधिक है। लेकिन सवाल यह उठता है कि ऐसा क्यों हो रहा है? और अगर ये पक्षी धरती से खत्म हो गए, तो इंसानों और पर्यावरण पर इसका क्या असर पड़ेगा? आइए इन सवालों के जवाब विस्तार से जानते हैं।
गिद्धों और शिकारी पक्षियों की आबादी घटने के मुख्य कारण
वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने इन पक्षियों की घटती संख्या के पीछे मानवीय और प्राकृतिक दोनों तरह के कारणों को जिम्मेदार माना है:
1. जहरीले कीटनाशकों और दवाओं का प्रयोग
खेती में इस्तेमाल होने वाले अत्यधिक जहरीले कीटनाशक इन पक्षियों के लिए काल बन रहे हैं। इसके अलावा, जानवरों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ‘डाइक्लोफेनाक’ (Diclofenac) जैसी दर्द निवारक दवाएं गिद्धों की मौत का सबसे बड़ा कारण रही हैं। जब गिद्ध इन मरे हुए जानवरों का मांस खाते हैं, तो ये रसायन उनके शरीर में जाकर उनकी किडनी फेल कर देते हैं।
2. बिजली के तार और पवन चक्कियां
विकास के नाम पर बिछाए गए हाई-टेंशन बिजली के तार और विशाल पवन चक्कियां इन बड़े पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं। उड़ते समय या शिकार करते वक्त ये पक्षी अक्सर तारों में उलझ कर करंट का शिकार हो जाते हैं या पवन चक्कियों के ब्लेड से टकरा कर जान गंवा बैठते हैं।
3. प्राकृतिक आवास का छिनना
शहरीकरण और जंगलों की कटाई के कारण इन पक्षियों से उनका घर और शिकार करने के बड़े इलाके छिनते जा रहे हैं। खाने और रहने की जगह की कमी के कारण ये बस्तियों की ओर आते हैं और हादसों का शिकार होते हैं।
4. अवैध शिकार
कई जगहों पर अंधविश्वास, पारंपरिक दवाओं के निर्माण या शौक के लिए इन पक्षियों का अवैध शिकार किया जाता है, जो इनकी आबादी में भारी गिरावट का एक प्रमुख कारण है।
5. धीमी प्रजनन दर
शिकारी पक्षियों की प्राकृतिक विशेषता है कि इनकी आबादी का घनत्व कम होता है और इनकी प्रजनन दर बहुत धीमी होती है। ये साल में कम अंडे देते हैं। इसलिए, अगर एक बार इनकी संख्या तेजी से घट जाए, तो उसे वापस रिकवर होने में दशकों का समय लग जाता है।
पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी हैं ये पक्षी?
शायद बहुत से लोगों को लगे कि इन पक्षियों के न होने से क्या फर्क पड़ेगा, लेकिन हकीकत में ये हमारे इकोसिस्टम के सबसे अहम सिपाही हैं।
- प्रकृति के सफाईकर्मी: गिद्ध और चील मरे हुए जानवरों को खाकर पर्यावरण को साफ रखते हैं। अगर ये मरे हुए जानवर यूं ही सड़ते रहें, तो हवा और पानी में खतरनाक बैक्टीरिया पनप सकते हैं।
- बीमारियों की रोकथाम: मरे हुए जीवों को समय पर खत्म करके ये पक्षी एंथ्रेक्स (Anthrax), रेबीज (Rabies) और कॉलरा जैसी घातक महामारियों को इंसानों और अन्य जानवरों में फैलने से रोकते हैं।
- चूहों और कीटों पर नियंत्रण: बाज और उल्लू जैसे पक्षी खेतों में चूहों और नुकसानदायक कीटों का शिकार करते हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से फसलों की रक्षा होती है।
आगे का रास्ता और समाधान
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अफ्रीका सहित दुनिया के कई हिस्सों में कुछ प्रजातियों की संख्या 50 प्रतिशत से भी ज्यादा कम हो चुकी है। अब समय आ गया है कि सरकारों और वन्यजीव संस्थाओं को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे।
हानिकारक दवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना, बिजली की लाइनों को ‘बर्ड-फ्रेंडली’ (Bird-friendly) बनाना और इनके प्राकृतिक आवासों को संरक्षित करना आज समय की मांग है। गिद्धों और शिकारी पक्षियों को बचाना केवल एक प्रजाति को बचाना नहीं है, बल्कि यह इंसानों के स्वस्थ भविष्य और सुरक्षित पर्यावरण के लिए भी बेहद जरूरी है।
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