अर्थ ऑवर के 20 साल: ग्वालियर में MoEFCC और WWF-India ने फूंका ‘मिशन लाइफ’ का बिगुल

दुनिया के सबसे बड़े जमीनी स्तर के पर्यावरणीय आंदोलन “अर्थ ऑवर” (Earth Hour) ने अपनी यात्रा के 20 शानदार वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर-इंडिया (WWF-India) ने मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर में विशेष जागरूकता और आउटरीच कार्यक्रमों का आयोजन किया। इस वर्ष का मुख्य संदेश “पृथ्वी के लिए एक घंटा दें” (Give an Hour for Earth) रहा, जिसने करोड़ों भारतीयों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।

ग्वालियर बना पर्यावरण संरक्षण का केंद्र

ग्वालियर में आयोजित इस कार्यक्रम में सरकार और संरक्षण विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी देखी गई। पर्यावरण मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री नमिता प्रसाद और संयुक्त निदेशक सुश्री लिपिका रॉय की उपस्थिति ने युवाओं में नया जोश भरा। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सिंधिया स्कूल और भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान (IITTM) रहे, जहाँ प्रदर्शनी और जागरूकता अभियानों के माध्यम से छात्रों को सस्टेनेबल लाइफस्टाइल के बारे में बताया गया।

अर्थ ऑवर 2026
Image Source: Press Information Bureau (PIB)

“स्विच-ऑफ” अभियान: एक प्रतीकात्मक शुरुआत

शनिवार रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक पूरे देश ने एक सुर में ऊर्जा संरक्षण का संकल्प लिया। ग्वालियर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में रात के इस एक घंटे के दौरान गैर-जरूरी लाइटें बंद रखी गईं। यह केवल बिजली बचाने का प्रयास नहीं था, बल्कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक था। देशभर के प्रतिष्ठित स्मारकों, विरासत स्थलों और सरकारी इमारतों ने भी इस स्विच-ऑफ अभियान में हिस्सा लेकर वैश्विक बिरादरी को भारत की प्रतिबद्धता का संदेश दिया।

हरित कौशल विकास कार्यक्रम (GSDP) की भूमिका

इस आयोजन की एक बड़ी खासियत “हरित कौशल विकास कार्यक्रम” के प्रशिक्षुओं की भागीदारी रही। “प्रकृति संरक्षक सह पर्यावरण पर्यटन गाइड” विषय पर प्रशिक्षण ले रहे युवाओं ने इस अभियान को घर-घर तक पहुँचाने का जिम्मा उठाया। 15 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के छात्रों ने इस अवसर पर सस्टेनेबल आदतों को अपनाने की शपथ ली।

मिशन लाइफ और अर्थ ऑवर का संगम

भारत सरकार का “मिशन लाइफ” (Lifestyle for Environment) इस आयोजन के मूल में रहा। WWF-India के संरक्षण प्रौद्योगिकी निदेशक डॉ. जी. अरेंद्रन ने जोर देकर कहा कि अर्थ ऑवर केवल लाइटें बंद करने तक सीमित नहीं है। यह उससे आगे बढ़कर सफाई अभियान, वृक्षारोपण, जैव विविधता संरक्षण और साइकिलिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से पृथ्वी को बेहतर बनाने का एक मंच है।

अर्थ ऑवर का 20 साल का सफर

साल 2007 में सिडनी से शुरू हुआ यह आंदोलन आज 190 से अधिक देशों तक पहुँच चुका है। भारत में इस साल की 20वीं वर्षगांठ विशेष रही क्योंकि इसमें व्यक्तिगत जिम्मेदारी के साथ-साथ सामुदायिक भागीदारी पर अधिक ध्यान दिया गया। ग्वालियर में आयोजित कार्यशालाओं में विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे छोटी-छोटी दैनिक आदतें, जैसे पानी बचाना या प्लास्टिक का उपयोग कम करना, वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

युवाओं की भागीदारी और भविष्य की राह

ग्वालियर के छात्रों और IITTM के प्रशिक्षुओं ने इस कार्यक्रम के दौरान ईको-टूरिज्म और सस्टेनेबल विकास पर अपने विचार साझा किए। मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, युवाओं की यह सक्रियता दर्शाती है कि आने वाली पीढ़ी पर्यावरण संकट को लेकर गंभीर है। “अर्थ ऑवर” के माध्यम से दी गई यह ‘एक घंटे’ की भेंट, भविष्य के 24 घंटों को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


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