मार्च का महीना खत्म होते-होते देश के मौसम में बड़े बदलाव देखने को मिल रहें हैं। एक तरफ जहाॅं दक्षिण और मध्य भारत में भीषण गर्मी ने दस्तक दे दी है, वहीं उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम काफी अस्थिर बना हुआ है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 28 मार्च 2026 को लेकर चेतावनी जारी की है कि अगले 24 से 48 घंटे देश के कई हिस्सों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकतें हैं।
पूर्वोत्तर भारत में “ऑरेंज अलर्ट” और भारी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, इस समय पूर्वोत्तर भारत के ऊपर एक तेज रफ्तार “जेट स्ट्रीम” सक्रिय है। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी वाली हवाओं के कारण अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भारी बारिश का अनुमान है। इन राज्यों के लिए “ऑरेंज अलर्ट” जारी किया गया है। अनुमान है कि यहां 64.5 मिलीमीटर से लेकर 115.5 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है।
इस मूसलाधार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में अचानक जलभराव और फिसलन की समस्या पैदा हो सकती है, जिससे यातायात बाधित होने की आशंका है। सिक्किम और उप-हिमालयी क्षेत्र पश्चिम बंगाल में भी गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है।
उत्तर और मध्य भारत: ओलावृष्टि का डर
मैदानी इलाकों की बात करें तो बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों में आज ओलावृष्टि की प्रबल आशंका है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के चलते हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। ओले गिरने से न केवल आम जनजीवन प्रभावित होगा, बल्कि बागवानी और फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचने की उम्मीद है।
वहीं, दिल्ली-एनसीआर में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। यहां हल्की बूंदाबांदी या गरज के साथ छींटे पड़ने से मौसम थोड़ा सुहावना बना रह सकता है, जिससे लोगों को फिलहाल चुभती गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि, राजस्थान और हरियाणा के कुछ हिस्सों में तेज धूल भरी हवाएं चलने का अनुमान है।
दक्षिण भारत में “हीटवेव” जैसे हालात
जहां उत्तर में बारिश का दौर है, वहीं दक्षिण भारत सूरज की तपिश से झुलस रहा है। आंध्र प्रदेश के कुरनूल में पारा 41.5 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को पार कर गया है, जो इस सीजन के सबसे उच्चतम स्तरों में से एक है। तटीय कर्नाटक और केरल के इलाकों में भी उमस भरी गर्मी ने लोगों का हाल बेहाल कर रखा है। मौसम विभाग ने सलाह दी है कि दोपहर 12 से 3 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें और शरीर में पानी की कमी न होने दें।
समुद्री तटों पर अलर्ट: मछुआरों को चेतावनी
ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में समुद्र के भीतर हलचल तेज है। तटीय क्षेत्रों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन ने मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी है। अरब सागर के कुछ हिस्सों में भी मौसम प्रतिकूल बना हुआ है।
किसानों के लिए “सुरक्षा चक्र” और जरूरी सावधानी
अस्थिर मौसम और ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए हैं, जो उनकी मेहनत की फसल को बर्बाद होने से बचा सकते हैं:
- जल निकासी का प्रबंधन: जिन क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट है, वहां किसान भाई अपने खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें ताकि फसलों की जड़ें न गलें।
- कटाई और भंडारण: जो फसलें पककर तैयार हो चुकी हैं, उन्हें जल्द से जल्द काटकर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर पहुंचाएं। कटी हुई फसल को खुले में छोड़ने के बजाय तिरपाल या प्लास्टिक शीट से ढककर रखें।
- सब्जियों और फलों की सुरक्षा: ओलावृष्टि से बचाने के लिए बागवानी फसलों और छोटी नर्सरी के ऊपर एंटी-हेल नेट या अस्थायी शेड का उपयोग करें।
- कीटनाशकों का प्रयोग: बारिश और तेज हवा के दौरान किसी भी प्रकार के कीटनाशक या खाद का छिड़काव न करें, क्योंकि यह पानी के साथ बहकर व्यर्थ हो जाएगा।
- मवेशियों का ध्यान: खराब मौसम और बिजली गिरने की स्थिति में पशुओं को खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे बांधने के बजाय पक्के और सुरक्षित छप्पर के नीचे रखें।
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