भारतीय रेलवे और पर्यावरण मंत्रालय ने रेल पटरियों पर हाथियों के रेल-एक्सीडेंट में होने वाले मृत्यु दर को रोकने के लिए 705 शमन संरचनाएं और AI आधारित तकनीक पूर्व चेतावनी प्रणाली का रोडमैप तैयार किया है। जानिए किन 14 राज्यों में लागू होंगे ये नियम और कैसे सुरक्षित होगा हाथी गलियारा।
नई दिल्ली: भारत में रेल पटरियों पर हाथियों की बढ़ती मृत्यु दर को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक रोडमैप तैयार किया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के “प्रोजेक्ट एलिफेंट” डिवीजन ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और रेल मंत्रालय के साथ मिलकर एक उच्च स्तरीय कार्यशाला में नीतिगत सुधारों और बुनियादी ढांचे में बड़े बदलावों की घोषणा की है।
705 शमन संरचनाओं का होगा निर्माण
देशभर में हाथियों के आवासों से गुजरने वाले करीब 3,452 किलोमीटर लंबे रेलवे नेटवर्क का सूक्ष्म आकलन करने के बाद, सरकार ने 77 सबसे संवेदनशील रेल खंडों को प्राथमिकता के आधार पर चुना है। इन क्षेत्रों में हाथियों के सुरक्षित आवागमन के लिए कुल 705 विशेष संरचनाएं बनाने की सिफारिश की गई है।

इन संरचनाओं के तहत निम्नलिखित निर्माण कार्य किए जाएंगे:
- अंडरपास और ओवरपास: हाथियों के गुजरने के लिए 65 नए अंडरपास और 22 ओवरपास (Eco-bridges) बनाए जाएंगे।
- रैंप और क्रॉसिंग: ट्रैक पार करने में आसानी के लिए 503 विशेष रैंम और लेवल क्रॉसिंग विकसित होंगे।
- बाड़ और खाई: हाथियों को असुरक्षित रास्तों पर जाने से रोकने के लिए 39 जगहों पर फेंसिंग और खाई का निर्माण होगा।
- पुलों का आधुनिकीकरण: 72 मौजूद रेलवे पुलों में बदलाव किया जाएगा ताकि हाथी उनके नीचे से सुरक्षित निकल सकें।
असम में बनेगा 3.5 किलोमीटर लंबा ऊचा ट्रैक
इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण असम के अजारा-कामाख्या रेलवे खंड पर प्रस्तावित प्रोजेक्ट है। यह हिस्सा रानी-गरभंगा-दीपोर बील हाथी गलियारे को काटता है, जहाॅं अतीत में कई दर्दनाक हादसे हुए हैं। अब इस 3.5 किलोमीटर लंबे संवेदनशील हिस्से को जमीन से ऊंचा किया जाएगा, जिससे हाथी बिना किसी बाधा के ट्रैक के नीचे से अपने प्राकृतिक आवास में आ-जा सकेंगे।
AI और सेंसर तकनीक से लैस होगा “स्मार्ट रेलवे”
हादसों को शून्य पर लाने के लिए सरकार पारंपरिक उपायों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है:
- इंट्रूडर डिटेक्शन सिस्टम (IDS): “डिस्ट्रीब्यूटेड एकाॅस्टिक सिस्टम” पर आधारित यह तकनीक रेल पटरियों के पास हाथियों के पैरों की आहट को पहचान लेती है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में इसके सफल परीक्षण के बाद अब इसे पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कुछ हिस्सों में भी लागू किया जा रहा है।
- थर्मल और मोशन सेंसर: तमिलनाडु के मदुक्कराई में AI-आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित की गई है। इसमें 12 टावर-माउंटेड कैमरे लगे हैं जो 100 मीटर के दायरे में हाथी की मौजूदगी का पता चलते ही रेलवे कंट्रोल रूम और लोको पायलट को अलर्ट भेज देते हैं।
इन राज्यों पर रहेगा विशेष फोकस
भारत में दुनिया की एशियाई हाथी आबादी का 60% से अधिक हिस्सा रहता है। रिपोर्ट के अनुसार, रेल नेटवर्क के विस्तार और आवासों के विखंडन के कारण असम, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, ओडिशा, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों में हाथियों की मृत्यु दर सबसे अधिक है। नई कार्यशाला में इन राज्यों के वन विभागों और रेलवे के बीच रियल-टाइम डेटा शेयरिंग और “स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल” बनाने पर सहमति बनी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक शमन रणनीतियों और तकनीक के इस मेल से न केवल हाथियों का संरक्षण होगा, बल्कि रेल परिचालन भी सुरक्षित और निर्बाध बनाया जा सकेगा।
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