देश के अलग-अलग हिस्सों में इस समय मौसम का हाल पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। एक तरफ जहां देश के कुछ राज्यों में मानसून के कमजोर होने से लोगों को भीषण गर्मी और चिपचिपी उमस का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ कई राज्य ऐसे भी हैं जहां भारी बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है, जबकि देश की राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से मौसम शुष्क और गर्म बना हुआ है।
दिल्ली-एनसीआर में मानसून पड़ा कमजोर, उमस ने छुड़ाए पसीने
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद समेत पूरे दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए फिलहाल गर्मी से राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ गई हैं। इसके कारण आसमान साफ है और तेज धूप निकल रही है।
राजधानी में अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। तापमान में इस बढ़ोतरी और हवा में नमी की उच्च मात्रा के कारण उमस का स्तर काफी बढ़ गया है, जिससे लोग बेहाल हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश की कोई संभावना नहीं है, हालांकि स्थानीय स्तर पर हल्के बादल छाए रह सकते हैं या कहीं-कहीं बहुत हल्की बूंदाबांदी हो सकती है, जो उमस को और ज्यादा बढ़ाएगी।
बिहार, सिक्किम और पूर्वोत्तर में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी
एक तरफ जहां उत्तर-पश्चिम भारत में लोग बूंद-बूंद बारिश को तरस रहे हैं, वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में प्रकृति का अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने असम, मेघालय, बिहार, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। इन राज्यों में अगले 24 से 48 घंटों के भीतर भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है।
मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक, इन इलाकों में न सिर्फ मूसलाधार बारिश होगी, बल्कि आकाशीय बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अंदेशा है। निचले इलाकों में जलभराव और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पश्चिमी विक्षोभ का पहाड़ी राज्यों पर असर
उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों की बात करें तो वहां भी मौसम का हाल तेजी से बदल रहा है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है। इस सिस्टम के प्रभाव से पहाड़ी इलाकों में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में अचानक तेज बारिश और कुछ जगहों पर बादल फटने जैसी घटनाएं भी सामने आ सकती हैं। पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर जाने से बचें।
अन्य राज्यों में ‘येलो अलर्ट’ और मानसूनी गतिविधियां
पूर्वोत्तर के अलावा मध्य और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भी मानसूनी हवाएं सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश के आसार हैं, जिसके लिए मौसम विभाग ने ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। वहीं, दक्षिण भारत के केरल और तटीय कर्नाटक में भी मानसून की सामान्य गतिविधि देखी जा रही है, जहां रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी है।
किसानों के लिए मौसम विभाग की जरूरी सलाह
बदलते मौसम और असामान्य बारिश को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों और मौसम विभाग ने किसानों के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की है:
1. भारी बारिश वाले क्षेत्र (जैसे बिहार और पूर्वोत्तर)
किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों में जलभराव न होने दें। धान और अन्य खरीफ फसलों के खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी की तुरंत व्यवस्था करें, ताकि फसलें सड़ने से बच सकें। साथ ही, भारी बारिश के दौरान खेतों में किसी भी तरह के उर्वरक या कीटनाशक का छिड़काव न करें।
2. कम बारिश वाले क्षेत्र (जैसे दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी)
जिन इलाकों में मानसून कमजोर है और धूप तेज हो रही है, वहां किसानों को फसलों की नमी बचाए रखने के लिए जरूरत के अनुसार हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है।
मानसून का बदला पैटर्न
देशभर में मौसम का हाल यह साफ दर्शाता है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का पैटर्न कितना बदल चुका है। कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ जैसी स्थिति ने आम जनजीवन के साथ-साथ कृषि क्षेत्र के लिए भी चुनौतियां खड़ी कर दी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम की चेतावनियों को गंभीरता से लें और भारी बारिश व आकाशीय बिजली चमकने के दौरान सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।
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